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चीताखेड़ा । श्रावण मास के पावन अवसर पर अंचल का प्रसिद्ध छोटा हरिद्वार रामझर महादेव में सोमवार,24 अगस्त को वर्ष के आखरी व चौथे सावन सोमवार को क्षेत्र में भरपूर बारिश,अमन चैन और सुख समृद्धि की कामना लिए आसपुरा से 14 किलोमीटर पैदल तक एक किलो से लेकर 51 किलो वजन तक की कांवड़िए कांवड़ लेकर अभिषेक व पूजन कर विनती हेतु सोमवार को सुबह 9 बजे श्री राम मंदिर समिति के तत्वावधान में कांवड़ यात्रा प्रारंभ हुई। कांवड़ यात्रा में नगर के साथ -साथ आस-पास के गांवों से भी महिलाएं सम्मिलित हुई।कांवड़ यात्रा जैस-जैसे आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते गए। 14 किलोमीटर का सफर तय कर हर हर महादेव....., बम-बम भोले......, ओम् नमः शिवाय के जयकारे के साथ कांवड़ियों का जज्बा इतना था कि चेहरे पर थकावट की सिकन तनिक भी दिखाई नहीं दे रही थी और दोपहर में यात्रा रामझर महादेव मंदिर पहुंची। कांवड़ यात्रा समिति के वरिष्ठ केशुराम जाट ने बताया कि इस बार 9 वीं कांवड़ यात्रा निकाली गई। जहां कांवड़ियों ने भगवान श्री रामझर महादेव को बिल्वपत्र, धतुरा,फूल, शक्कर,शहद, दही सहित कई सामग्री अर्पित कर जलाभिषेक किया। सोमवार सुबह 9 बजे मंदिर से राम मंदिर से आरती के बाद डीजे एवं ढोल ढमाकों के साथ कांवड़ यात्रा प्रारम्भ होकर गांव के मुख्य मार्गों से अरनिया , कराड़िया महाराज रामनगर- चीताखेड़ा से होते हुए रामझर महादेव पहुंचीं। श्री रामझर महादेव के सभी कांवड़ियों और श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से दिव्य दर्शन कर अभिषेक कर अंचल में खुशहाली और झमाझम बारिश की कामना की। कांवड़ यात्रा का जगह-जगह अनेक धर्मप्रेमी संस्थाओं द्वारा स्वागत सत्कार कर स्वल्पाहार कराया गया। चीताखेड़ा में डॉक्टर जितेन्द्र कुमार द्वारा केशव क्लिनिक पर कांवड़ यात्रियों का स्वागत कर पैदल यात्रियों को खिचड़ी की स्वल्पाहार कराई गई। आसपुरा के कांवड़ यात्रा समिति के केशुराम जाट ने बताया कि आसपुरा से 2016 से शुरू की गई थी। उस समय गांव के लोग ज्यादा कोई जानता नहीं था। कांवड़ यात्रा निकालने के दौरान कांवड़िए की संख्या कम देखकर हमें हंसी का पात्र भी बनना पड़ा था। आसपुरा से तब से लेकर आज तक सावन माह में निरंतर प्रतिवर्ष निकालते आ रहे हैं।कल जो कांवड़ यात्रा पर हंस रहे थे वो ही आज फूल बरसा रहे हैं। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |