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चीताखेड़ा । देश पहले से ही महंगाई से जूझ रहा है, पूर्व से बड़ी हुई महंगाई से संभल ही पा रहा और फिर देश में त्यौहारों का सीजन शुरू होते ही आम जनता की जेब पर महंगाई का बडा चाबुक चला दिया । हर घर के किचन की जरूरत और त्यौहारों की मिठास का मुख्य जरिया शक्कर (चीनी) के दामों में अप्रत्याशित बढोतरी दर्ज की गई है।बीते महज 18 दिनों के भीतर शक्कर का भाव 45 रुपये प्रति किलो से छलांग लगाकर सीधा 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों और व्यापारियों की मानें तो रक्षाबंधन के त्यौहार तक इसके दाम 80 रुपये प्रति किलो का आंकडा पार कर सकते हैं। *किचन से लेकर मिष्ठान भंडार तक सब परेशान*- शक्कर के दामों में आई इस तूफानी तेजी ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है। घर का बजट पूरी तरह गडबडा गया है। त्यौहारी सीजन में मिठाई और पकवान बनाना आम परिवारों की पहुंच से बाहर होता दिख रहा है। चाय की दुकानों और नाश्ते के ठेले वालों के लिए मार्जिन बनाए रखना मुश्किल हो गया है। या तो वे चाय के दाम बढा रहे हैं या फिर मात्रा घटाने पर मजबूर हैं। रक्षाबंधन पर मिठाइयों की सबसे अधिक खपत होती है। चीनी के दाम बढने से मिठाइयों के निर्माण की लागत काफी बढ गई है, जिससे त्यौहार पर मिठाइयों के भाव भी आसमान छूने की उम्मीद है। *गरीबों की थाली से गायब हो रही मिठास*- महंगाई की इस सबसे ज्यादा मार देश के गरीब और मध्यम वर्ग पर पड रही है, जो चीनी कल तक हर साधारण से साधारण घर की मिठास बनी हुई थी, आज वही शक्कर रसोई का बजट बिगाड रही है। त्यौहार के इस माहौल में जहां खुशियाँ बंटनी चाहिए थीं, वहां आम आदमी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए कटौती करने को मजबूर है। *सत्ताधारी महंगाई से भटका रहे, तो वहीं विपक्ष की खामोशी पर उठे सवाल*- एक तरफ जनता महंगाई से त्रस्त है, वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी दल के नेता महंगाई से जनता को भटकाने के लिए कभी किसी की रथयात्रा तो कभी अन्य मुद्दों को उछाल रही है, तो वहीं विपक्ष की नीरसता और चुप्पी पर भी सवाल खडे हो रहे हैं। इतने गंभीर और जन-सरोकार से जुडे मुद्दे पर, जो सीधे हर नागरिक की जेब से जुडा है, विपक्ष द्वारा कोई प्रभावी विरोध या जन-आंदोलन न देखने को मिलना हैरान करने वाला है। जनप्रतिनिधियों और विरोधी दलों की इस बेरुखी से जनता खुद को बेबस महसूस कर रही है। त्यौहारों के इस सीजन में सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर शक्कर और अन्य जरूरी खाद्य पदार्थों की कालाबाजारी पर रोक लगानी चाहिए तथा दामों को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि आम आदमी का त्यौहार फीका न पडे। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |