रतलाम
शहर में परशुराम चौराहा की मांग अब सामाजिक आंदोलन का रूप लेती जा रही है। विप्र समाज की आस्था और सम्मान से जुड़ी इस मांग को लेकर शुक्रवार को परशुराम युवा संघ का प्रतिनिधिमंडल नगर निगम आयुक्त अनिल भाना से मिला और दिलबहार चौराहे को ‘परशुराम चौराहा’ घोषित करते हुए वहां भगवान परशुराम के प्रतीक स्वरूप फरसा स्थापित करने की मांग रखी।
संघ ने कहा कि निगम द्वारा गढ़ कैलाश क्षेत्र में फरसा स्थापित करने की योजना बनाई गई है, लेकिन समाज की भावना के अनुरूप यह प्रतीक दिलबहार चौराहे पर लगाया जाना चाहिए, जिससे शहर को एक नई सांस्कृतिक पहचान मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त के समक्ष तर्क दिया कि दिलबहार चौराहा शहर का प्रमुख और चर्चित स्थान है। यदि यहां भगवान परशुराम के अस्त्र फरसा की स्थापना होती है, तो यह न केवल विप्र समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी करेगा, बल्कि शहर के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को भी बढ़ाएगा। समाजजन का कहना है कि वर्षों से इस चौराहे को परशुराम चौराहा नाम देने की मांग उठती रही है, लेकिन हर बार प्रशासनिक उदासीनता के कारण मामला अधूरा रह गया।
मुलाकात के दौरान नगर निगम आयुक्त अनिल भाना ने इस पूरे विषय पर खुद को निर्णय लेने से अलग बताते हुए कहा कि अंतिम फैसला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और इस संबंध में निर्णय महापौर स्तर पर ही लिया जा सकता है। आयुक्त के इस जवाब ने संघ के सदस्यों को नाराज कर दिया। उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी जिम्मेदारी लेने के बजाय एक-दूसरे पर निर्णय टाल रहे हैं, जिससे समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं।
परशुराम युवा संघ ने आयुक्त के रवैये को निराशाजनक बताते हुए कहा कि यदि निगम गढ़ कैलाश में फरसा स्थापित करने का प्रस्ताव बना सकता है, तो उसे दिलबहार चौराहे पर स्थानांतरित करना भी संभव है। इसके लिए केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक सहमति की आवश्यकता है।
संघ ने स्पष्ट किया है कि अब वे जल्द ही महापौर से मुलाकात कर अपनी मांग मजबूती से रखेंगे। यदि वहां से भी सकारात्मक निर्णय नहीं मिलता, तो समाजजन बड़े स्तर पर आंदोलन की राह अपनाएंगे। संघ का कहना है कि यह केवल एक चौराहे का नामकरण नहीं, बल्कि विप्र समाज की आस्था, सम्मान और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विषय है।
इस दौरान परशुराम युवा संघ के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे। जानकारी पत्रकार भरत शर्मा द्वारा दी
रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत