जबलपुर
मध्य प्रदेश में 1997 से 2005 के बीच भर्ती हुए लगभग तीन लाख पुराने संविदा शिक्षकों की पेंशन ग्रेच्युटी सीनियरिटी और सेवा अवधि को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (शिक्षा विभाग) ने जबलपुर हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्पष्ट कहा है कि ये शिक्षक कभी सरकारी कर्मचारी नहीं थे, इसलिए उन्हें पुरानी सेवा की गिनती पेंशन और अन्य लाभों में नहीं मिलनी चाहिए।
विभाग का तर्क
शिक्षा विभाग ने कोर्ट को बताया कि 73वें और 74वें संविधान संशोधन के बाद स्कूलों का प्रशासन पंचायतों और नगर निकायों को सौंप दिया गया था। इसलिए 1997, 1998, 2001 और 2005 में पंचायतों/नगर निकायों के माध्यम से भर्ती हुए शिक्षक पंचायत/निकाय कर्मचारी माने जाते हैं, न कि राज्य सरकार के कर्मचारी।
2018 में इन्हें नया कैडर बनाकर फिर से नियुक्त किया गया। विभाग का立场 है कि इनकी सीनियरिटी केवल 2018 से ही गिनी जाएगी। इससे पहले की सेवा को पेंशन, प्रमोशन और अन्य लाभों के लिए गिना जाना गलत होगा।
शिक्षकों का विरोध
शिक्षकों की ओर से याचिका दायर करने वाले अध्यापक राजेश मिश्रा ने विभाग के हलफनामे को विरोधाभासी बताया है। उनका कहना है:
भर्ती भले ही पंचायतों के माध्यम से हुई हो, लेकिन वेतन हमेशा स्कूल शिक्षा विभाग के बजट से आता रहा।
स्कूलों की जमीन, स्टाफ, ट्रांसफर, ट्रेनिंग और नियंत्रण पूरी तरह शिक्षा विभाग के पास ही रहा।
कई जिला पंचायतों (जैसे मंदसौर) ने लिखित में स्वीकार किया है कि ये शिक्षक उनके नियंत्रण में नहीं थे।
CAG रिपोर्ट (2023-24) में भी यही बात सामने आई है कि असली नियंत्रण शिक्षा विभाग के पास था और पंचायत-निकाय केवल भर्ती एजेंसी की भूमिका निभा रहे थे।
शिक्षक मांग कर रहे हैं कि उनकी पूरी सेवा अवधि (1997 से) को सीनियरिटी, पेंशन और अन्य लाभों में शामिल किया जाए।
विभागीय अधिकारियों में भी विरोधाभास
हलफनामे को लेकर विभागीय स्तर पर भी असमंजस की स्थिति है। DPI डायरेक्टर केके द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया है। वहीं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया कि ये शिक्षक उनके कर्मचारी नहीं रहे।
क्या कहते हैं शिक्षक संगठन
इस मुद्दे पर शिक्षक संगठन आक्रोशित हैं। उन्होंने इसे शिक्षकों के साथ धोखा बताया है। हजारों शिक्षक जल्द ही रिटायर होने वाले हैं और यदि कोर्ट विभाग के पक्ष में फैसला देता है तो उनकी पेंशन बेहद कम हो जाएगी या कई मामलों में शून्य भी हो सकती है।
अगली सुनवाई: 3 जुलाई 2026 को जबलपुर हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई होगी। कोर्ट का फैसला पूरे प्रदेश के पुराने शिक्षकों के भविष्य पर असर डालेगा।
Reporter Jitendra Kumawat