रतलाम। शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने के लिए नगर निगम द्वारा इंद्रानगर तिराहे पर कुछ समय पहले बनाया गया आकर्षक फुटपाथ अब अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। जिस फुटपाथ और तिराहे को शहर की खूबसूरती बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित किया गया था, वहां अब अस्थाई घूमटियों और अवैध दुकानों ने कब्जा जमा लिया है। हालात यह हैं कि फुटपाथ का मूल स्वरूप ही नजर नहीं आता और सार्वजनिक सुविधा के लिए विकसित स्थान धीरे-धीरे अतिक्रमण की चपेट में जाता दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार तिराहे के आसपास कुछ दुकानों के पीछे लोगों ने वॉशरूम तक बना लिए हैं। सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की गतिविधियों से स्वच्छता और व्यवस्था दोनों प्रभावित हो रही हैं। वहीं इन अस्थाई दुकानों में किस प्रकार का सामान रखा जाता है और इनके संचालन की अनुमति किस स्तर से मिली है, यह भी जांच का विषय है। नागरिकों का कहना है कि अतिक्रमण की आड़ में किसी भी प्रकार की अवांछित गतिविधि को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए।
शौचालय की व्यवस्था नहीं, खुले में मूत्र विसर्जन से बढ़ी परेशानी
इंद्रानगर तिराहे की दूसरी बड़ी समस्या सार्वजनिक शौचालय और मूत्रालय की कमी है। बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण के दौरान पूर्व में मौजूद नगर निगम की शौचालय व्यवस्था/संरचना को हटा दिया गया था। इसके बाद से यहां पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं हो सकी। नतीजा यह है कि लोग खुले में मूत्र विसर्जन करते दिखाई देते हैं। कई लोग वाहनों और स्कूटी की आड़ लेकर सार्वजनिक स्थान पर ही इस तरह की गतिविधि करते हैं।
इसका सीधा असर महिलाओं, बच्चियों और स्कूली विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। गांधी नगर मुख्य मार्ग से होकर रोजाना बड़ी संख्या में नागरिक गुजरते हैं। ऐसे में खुले में मूत्र विसर्जन, गंदगी और दुर्गंध के कारण राहगीरों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है खासकर महिलाओं के लिए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
नगर निगम की कार्रवाई का इंतजार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शहर में स्वच्छता और सुंदरता को लेकर नगर निगम द्वारा लगातार अभियान चलाए जाते हैं तो इंद्रानगर तिराहे जैसी प्रमुख जगह पर यह स्थिति कैसे बनी हुई है? स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समस्या सामने आने के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई है।
नागरिकों की मांग है कि नगर निगम प्रशासन जल्द से जल्द इंद्रानगर तिराहे का स्थल निरीक्षण करे, फुटपाथ से अवैध एवं अस्थाई अतिक्रमण हटाए और सार्वजनिक स्थान को उसके मूल स्वरूप में वापस लाए। साथ ही पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग सार्वजनिक शौचालय एवं मूत्रालय की व्यवस्था तत्काल की जाए।
सिर्फ इंद्रानगर नहीं, पूरे शहर की जरूरत
यह मामला केवल इंद्रानगर तिराहे तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि शहर के अन्य चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर भी शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है तो नगर निगम को पूरे शहर का सर्वे कराकर आवश्यक स्थानों पर सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
रतलाम की पहचान स्वच्छ और सुंदर शहर के रूप में बने, इसके लिए विकास कार्यों के साथ उनका संरक्षण भी जरूरी है। नगर निगम ने फुटपाथ बनाया, अब उसकी सुंदरता बचाने की जिम्मेदारी भी निगम की है।
अतिक्रमण हटे, सार्वजनिक शौचालय बने और महिलाओं-बच्चियों सहित आम नागरिकों को सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण मिले—यही इंद्रानगर क्षेत्र के नागरिकों की मांग है। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन इस गंभीर जनसमस्या को कितनी जल्दी संज्ञान में लेकर जमीन पर कार्रवाई करता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत