रतलाम / बाजना। चातुर्मास के पावन अवसर पर बाजना में विराजित परम पूज्य साध्वी अर्पिता श्रीजी म.सा. के सान्निध्य में धर्म आराधना और तपस्या का क्रम निरंतर जारी है। प्रवचन के दौरान साध्वी श्रीजी ने कहा कि मानव जीवन में कर्मों की निर्जरा के लिए तप, आराधना और साधना का विशेष महत्व है। तपस्या केवल शरीर को कष्ट देने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है।
इसी क्रम में उपकारी परम पूज्य साध्वी श्री सौम्ययशा श्रीजी म.सा. के 24 दिवसीय समाधि मरण उपवास के निमित्त सांसद प्रतिनिधि सतीश नाहार की पुत्रवधू डाली यश नाहार द्वारा की जा रही तप आराधना में 16 उपवास पूर्ण होने पर धार्मिक वातावरण में उनका पारणा कराया गया। परम पूज्य साध्वी अर्पिता श्रीजी म.सा. के आशीर्वाद एवं परिवारजनों तथा श्रीसंघ की उपस्थिति में तपस्वी डाली नाहार ने पारणा किया।
16 उपवास जैसी कठिन तपस्या पूर्ण होने पर श्रीसंघ में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण दिखाई दिया। इस अवसर पर उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्वी के तप की अनुमोदना करते हुए उनके उज्ज्वल आध्यात्मिक जीवन की मंगलकामना की।
श्रीसंघ की ओर से संघ अध्यक्ष संदीप नाहार, विमल कोठारी, दीपक कोठारी, प्रणय पालरेचा, पंकज पालरेचा, जेपी कटारिया, वर्धमान पितलिया, मनोज नाहार, लक्ष्मीचंद जैन, अंशुल पालरेचा, ऋषभ मूणत, निलेश चौरडिया, मनीष कावड़िया, विकास चौरडिया, चातुर्मास समिति अध्यक्ष मयूर कोठारी, सुरेश लूणावत एवं अर्पण चौरडिया सहित समाजजनों ने तपस्वी डाली नाहार की तपस्या की खूब-खूब अनुमोदना की।
समारोह में श्रीसंघ की ओर से तपस्वी डाली नाहार का बहुमान भी किया गया। साध्वी अर्पिता श्रीजी ने तपस्या के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तप और संयम व्यक्ति को आत्मचिंतन की ओर ले जाते हैं। चातुर्मास के दौरान ऐसी तप आराधनाएं समाज में धर्म, संयम और त्याग की भावना को मजबूत करती हैं।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत