रतलाम। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित ज्ञान नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और चरित्र निर्माण की मजबूत नींव है। एक अच्छा शिक्षक वही है, जो विषय का गहरा ज्ञान रखने के साथ कठिन से कठिन बात को भी सरल भाषा में समझाए और विद्यार्थियों के भीतर सीखने की ललक तथा जिज्ञासा पैदा करे।
विद्यार्थी जब सवाल पूछना सीखता है, तभी वास्तविक शिक्षा की शुरुआत होती है। यह बात राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ शिक्षिका सीमा अग्निहोत्री ने जवाहर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की छात्रा गोरी चौहान एवं वरिष्ठ शिक्षिका विनीता ओझा के साथ विशेष चर्चा के दौरान कही।
एजुकेशन फॉर ऑल विषय पर विद्यार्थियों से संवाद करते हुए सीमा अग्निहोत्री ने कहा कि विद्यार्थी जीवन में अनुशासन सफलता के साथ-साथ उज्ज्वल चरित्र की भी आधारशिला है। समय का सदुपयोग, नियमों का पालन और नियमित अध्ययन जैसी आदतें विद्यार्थियों को जीवन में सही दिशा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि किताबी ज्ञान व्यक्ति को बुद्धिमान बना सकता है, लेकिन विनम्रता, मानवीय संवेदनाएं, बड़ों का सम्मान और जिम्मेदारी जैसे गुण शिक्षक द्वारा दिए गए संस्कारों से विकसित होते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि किसी विद्यार्थी की सफलता उसके शिक्षक के लिए सबसे बड़ी खुशी होती है। आज के विद्यार्थी ही कल देश के जिम्मेदार नागरिक बनेंगे। राष्ट्र निर्माण में विद्यार्थियों की सक्रिय और सकारात्मक भागीदारी से ही समृद्ध राष्ट्र की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।
कार्यक्रम में प्राचार्य मंजूलता जादौन ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। मनीषा सरयाम एवं ऋषिकेश चौहान ने सहयोग प्रदान किया। रीना खराड़ी, लखन मुनिया, लक्ष्मी गामड़, सुमन मईडा, रेखा मईडा, तनप्रीत रोझा एवं सिमरन पवार ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को रचनात्मकता से जोड़ा। विशेष अतिथि के रूप में सुरेंद्र अग्निहोत्री उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विनीता ओझा ने आभार व्यक्त किया।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत