रतलाम। शहर की सागोद रोड स्थित नगर निगम की गौशाला से सामने आ रही तस्वीरें और शिकायतें यदि सही हैं तो यह केवल अव्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि बेजुबान गोवंश की जिंदगी और नगर निगम की जिम्मेदारी से जुड़ा बेहद गंभीर विषय है। गौशाला में गोवंश की देखभाल, भोजन, पानी और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों एवं गौभक्तों का आरोप है कि गौशाला में कई बार दो से तीन दिनों तक पर्याप्त चारा-पानी की व्यवस्था नहीं हो पाती। बीमार और कमजोर गोवंश को पर्याप्त पौष्टिक एवं हरा चारा नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस स्थान पर बेसहारा और बीमार गोवंश को संरक्षण मिलना चाहिए, वहां यदि भोजन और पानी की व्यवस्था ही कमजोर हो तो इन बेजुबानों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
27 अगस्त से घायल बछड़ा उपचार की बाट जोह रहा?
सबसे गंभीर मामला 27 अगस्त को गौशाला लाए गए लाल रंग के घायल बछड़े का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार उसका पिछला पैर टूटा हुआ है और पैर में गंभीर चोट एवं जख्म है। आरोप है कि उसकी हालत खराब होने के बावजूद उसे अपेक्षित उपचार नहीं मिल पाया।
सवाल सीधा है—घायल बछड़े को समय पर इलाज क्यों नहीं मिला?
वहीं गौशाला में एक छोटे बछड़े की उपचार के अभाव में मौत होने की बात भी सामने आई है। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो यह बेहद गंभीर प्रशासनिक प्रश्न होगा कि क्या समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई थी?
एक डॉक्टर के भरोसे सैकड़ों गोवंश?
गौशाला की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यहां एक डॉक्टर की व्यवस्था है, लेकिन डॉक्टर का समय अन्य स्थानों पर पशुओं के उपचार में भी व्यतीत होता है। ऐसे में सवाल है कि गौशाला में मौजूद बीमार, घायल और कमजोर गोवंश की 24 घंटे अथवा नियमित चिकित्सा निगरानी कैसे हो रही है?
क्या गौशाला में पर्याप्त पशु चिकित्सक, दवाइयां, प्राथमिक उपचार सामग्री और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध है?
जिम्मेदार कौन?
गौशाला की जिम्मेदारी से जुड़े राजेंद्र सिंह पवार और विशाल शर्मा की भूमिका को लेकर गौभक्तों ने सवाल उठाए हैं। वहीं गौशाला अध्यक्ष के रूप में महापौर तथा नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों से भी जवाब मांगा जा रहा है।
गौभक्तों का कहना है कि यदि गौशाला में व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त हैं तो प्रशासन मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करे। यदि कमियां हैं तो जिम्मेदारी तय कर तत्काल सुधार कराया जाए।
अब कागजी दावों से नहीं चलेगा काम!
गोसेवा के नाम पर संचालित गौशाला में गोवंश को पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी, उपचार और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। यदि इन मूलभूत सुविधाओं में भी कमी है तो यह पूरे प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
समस्त गौभक्त रतलाम की मांग है कि जिला प्रशासन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल सागोद रोड गौशाला का औचक निरीक्षण करें। निरीक्षण के दौरान चारे का स्टॉक, पानी की व्यवस्था, मृत गोवंश का रिकॉर्ड, पशु चिकित्सा रजिस्टर, दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टर की उपस्थिति तथा गौशाला की संपूर्ण व्यवस्थाओं की जांच की जाए।
गोभक्तों का कहना है कि बेजुबान बोल नहीं सकते, लेकिन उनकी हालत बहुत कुछ कह रही है। अब प्रशासन को तय करना होगा कि इनकी पीड़ा पर कार्रवाई होगी या फिर मामला केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित रहेगा।
रतलाम प्रशासन से बड़ा सवाल—सागोद रोड गौशाला में गोवंश की हालत आखिर इतनी खराब क्यों बताई जा रही है? जिम्मेदारी तय होगी या फिर एक और शिकायत फाइलों में दब जाएगी?
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत