रतलाम / जावरा । जावरा विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से बने विकास कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गोंदीधर्मसी से भिंडाजी स्थित प्रसिद्ध मनकामेश्वर महादेव मंदिर एवं चंबल नदी त्रिवेणी संगम तक बनाई गई लगभग 2 किलोमीटर लंबी डामर सड़क आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है।
1 करोड़ 26 लाख 22 हजार रुपये की लागत से निर्मित यह सड़क बनने के करीब ढाई वर्ष बाद ही जगह-जगह से उखड़ चुकी है।
सड़क की डामर परत निकल गई है गिट्टियां बिखर गई हैं और बड़े-बड़े गड्ढों ने पूरे मार्ग को खतरनाक बना दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि सड़क पर 5 वर्ष की परफॉर्मेंस गारंटी लागू है लेकिन गारंटी अवधि पूरी होने से पहले ही इसकी हालत चिंताजनक हो गई है।
जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग संभाग रतलाम द्वारा इस सड़क का निर्माण कराया गया था। कार्य 7 जुलाई 2023 को प्रारंभ हुआ और अनुबंध के अनुसार 7 दिसंबर 2023 तक पूर्ण किया जाना था। निर्माण कार्य पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होती तो इतनी कम अवधि में यह जर्जर नहीं होती।
यह सड़क केवल ग्रामीणों के आवागमन का मार्ग नहीं बल्कि क्षेत्र के प्रसिद्ध मनकामेश्वर महादेव मंदिर और चंबल नदी त्रिवेणी संगम तक पहुंचने का मुख्य रास्ता है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वर्ष में तीन बार लगने वाले धार्मिक मेलों तथा महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालुओं का आवागमन इसी मार्ग से होता है।
खराब सड़क के कारण श्रद्धालुओं महिलाओं बुजुर्गों बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रात के समय गड्ढे दिखाई नहीं देने से दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह डामर उखड़ चुका है और गिट्टियां निकलने से वाहन फिसलने का खतरा बढ़ गया है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया जिसके कारण करोड़ों रुपये की यह सड़क समय से पहले ही जवाब दे गई। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य तकनीकी मानकों के अनुसार हुआ होता तो सड़क की यह स्थिति नहीं होती।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए। यदि निर्माण में लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
साथ ही 5 वर्ष की परफॉर्मेंस गारंटी के प्रावधानों के तहत ठेकेदार से सड़क का तत्काल गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराया जाए ताकि आमजन और श्रद्धालुओं को सुरक्षित आवागमन मिल सके।
उल्लेखनीय है कि इस कार्य का ठेका एस.आर. इंजीनियर एंड कांट्रेक्टर जावरा को दिया गया था। विभाग की ओर से कार्यपालन यंत्री अनुराग सिंह अनुविभागीय अधिकारी हिमांशु जैन तथा उपयंत्री कुलदीप पटेल इस कार्य से जुड़े अधिकारी थे ।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 5 वर्ष की गारंटी वाली सड़क ढाई वर्ष में ही जर्जर हो गई तो इसकी जवाबदेही किसकी है?
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि जनता को सुरक्षित और टिकाऊ सड़क नहीं मिल रही है तो यह केवल निर्माण गुणवत्ता का नहीं बल्कि सरकारी धन के उपयोग और जवाबदेही का भी गंभीर मामला है।
क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोक निर्माण मंत्री और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराई जाए दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा सड़क का गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराया जाए ताकि भविष्य में जनता को ऐसी बदहाल सड़कों का सामना न करना पड़े।
रिपोर्टर जीतेन्द्र कुमावत