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ब्रेकिंग न्यूज़..... सूखा घोषित होने के बाद भी सैलाना में धड़ल्ले से चल रही हॉल बोरवेल मशीनें, एक ही रात में 4 से 5 हॉल करने की चर्चा जिले को सूखा प्रभावित घोषित करने के बावजूद भूजल का दोहन जारी, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा पानी निकालने का खेल? प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई पर उठे सवाल रतलाम/सैलाना। एक ओर प्रदेश सरकार ने रतलाम जिले को सूखा प्रभावित घोषित कर किसानों और आमजन को राहत देने की दिशा में कदम उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर सैलाना क्षेत्र में भूजल के दोहन का मामला सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र में हॉल बोरवेल मशीनों के लगातार संचालन की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि सैलाना क्षेत्र में एक ही रात में 4 से 5 हॉल किए जाने की चर्चा है। यदि यह जानकारी सही है तो सूखे की स्थिति में जल संरक्षण के सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में बारिश की कमी और जलस्रोतों की स्थिति को देखते हुए सूखे की स्थिति घोषित की जा चुकी है, तब भी क्षेत्र में इस तरह बोरवेल मशीनों का संचालन कैसे हो रहा है? क्या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी नहीं है या फिर जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले से अनजान बने हुए हैं? आखिर रात के अंधेरे में मशीनें चलने और लगातार नए हॉल किए जाने की गतिविधियों पर निगरानी कौन रख रहा है? सैलाना और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही पेयजल संकट और गिरते भूजल स्तर को लेकर चिंता बनी हुई है। कई गांवों में हैंडपंप और अन्य जलस्रोतों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण रही है। ऐसे हालात में यदि लगातार गहरे बोरवेल किए जा रहे हैं तो आने वाले समय में इसका असर आम ग्रामीणों, किसानों और पेयजल व्यवस्था पर पड़ सकता है। इस पूरे मामले में अब खनिज विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। सैलाना क्षेत्र में संचालित हॉल बोरवेल मशीनों की जांच की जाए। यह भी स्पष्ट किया जाए कि मशीन संचालकों के पास आवश्यक अनुमति है या नहीं और किन स्थानों पर कितने बोर किए जा रहे हैं। मिली जानकारी अनुसार संचालक द्वारा एक ही अनुमति लेकर चार पांच बोर किए जाने की खबर भी सामने आई है । अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर सैलाना में रात के अंधेरे में बोरवेल मशीनों का यह खेल यूं ही जारी रहता है। रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत |
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सूखा घोषित होने के बाद भी सैलाना में धड़ल्ले से चल रही हॉल बोरवेल मशीनें, एक ही रात में 4 से 5 हॉल करने की चर्चा
जिले को सूखा प्रभावित घोषित करने के बावजूद भूजल का दोहन जारी, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा पानी निकालने का खेल? प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई पर उठे सवाल
रतलाम/सैलाना। एक ओर प्रदेश सरकार ने रतलाम जिले को सूखा प्रभावित घोषित कर किसानों और आमजन को राहत देने की दिशा में कदम उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर सैलाना क्षेत्र में भूजल के दोहन का मामला सामने आने से प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। क्षेत्र में हॉल बोरवेल मशीनों के लगातार संचालन की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि सैलाना क्षेत्र में एक ही रात में 4 से 5 हॉल किए जाने की चर्चा है। यदि यह जानकारी सही है तो सूखे की स्थिति में जल संरक्षण के सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिले में बारिश की कमी और जलस्रोतों की स्थिति को देखते हुए सूखे की स्थिति घोषित की जा चुकी है, तब भी क्षेत्र में इस तरह बोरवेल मशीनों का संचालन कैसे हो रहा है? क्या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी नहीं है या फिर जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले से अनजान बने हुए हैं? आखिर रात के अंधेरे में मशीनें चलने और लगातार नए हॉल किए जाने की गतिविधियों पर निगरानी कौन रख रहा है?
सैलाना और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही पेयजल संकट और गिरते भूजल स्तर को लेकर चिंता बनी हुई है। कई गांवों में हैंडपंप और अन्य जलस्रोतों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण रही है। ऐसे हालात में यदि लगातार गहरे बोरवेल किए जा रहे हैं तो आने वाले समय में इसका असर आम ग्रामीणों, किसानों और पेयजल व्यवस्था पर पड़ सकता है।
इस पूरे मामले में अब खनिज विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। सैलाना क्षेत्र में संचालित हॉल बोरवेल मशीनों की जांच की जाए। यह भी स्पष्ट किया जाए कि मशीन संचालकों के पास आवश्यक अनुमति है या नहीं और किन स्थानों पर कितने बोर किए जा रहे हैं। मिली जानकारी अनुसार संचालक द्वारा एक ही अनुमति लेकर चार पांच बोर किए जाने की खबर भी सामने आई है ।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर सैलाना में रात के अंधेरे में बोरवेल मशीनों का यह खेल यूं ही जारी रहता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत