मंदसौर। केंद्र सरकार की नई अफीम नीति के विरोध में जिला नारकोटिक्स कार्यालय पर आयोजित कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन के दौरान मीडिया कवरेज कर रहे एक पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की और धमकी देने का मामला सामने आया है। आईएनएच हरिभूमि समाचार चैनल के संवाददाता कमलेश मोदी ने कांग्रेस के पूर्व विधायक नवकृष्ण पाटिल और उनके पुत्र आदित्य पाटिल पर अभद्रता और काम से रोकने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना को लेकर पत्रकारों में भारी आक्रोश है।
पत्रकार कमलेश मोदी ने 29 अक्टूबर को शहर कोतवाली थाने में लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। पुलिस को दिए आवेदन के अनुसार, कमलेश मोदी अपने साथी पत्रकारों—रवि पोरवाल, जाहिद खान और बालचंद आसलीया के साथ जिला अफीम कार्यालय पर प्रदर्शन की कवरेज करने पहुंचे थे। आरोप है कि बातचीत के दौरान पूर्व विधायक नवकृष्ण पाटिल ने उनके साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता करते हुए कवरेज करने से रोकने का प्रयास किया।
मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। भाजपा के पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर घटना की निंदा की। उन्होंने लिखा कि मंदसौर में अफीम विभाग के कार्यालय पर कांग्रेस के प्रदर्शन की कवरेज कर रहे आईएनएच हरिभूमि के संवाददाता कमलेश मोदी के साथ कांग्रेस के पूर्व विधायक नवकृष्ण पाटिल तथा अन्य सहयोगियों द्वारा यह घटना निंदनीय है।
सिसोदिया की इस सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद मामला राजनीतिक और मीडिया जगत में चर्चा का विषय बन गया है। पत्रकार के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर पत्रकारिता की स्वतंत्रता, मीडिया कर्मियों की सुरक्षा और राजनीतिक कार्यक्रमों की निष्पक्ष कवरेज के अधिकार पर सवाल उठ रहे हैं।
घटना के बाद साथी मीडिया कर्मियों ने भी नाराजगी जताई और कोतवाली थाने पहुंचकर मामले में कार्रवाई की मांग की। कमलेश मोदी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मांग की है कि यदि आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त संगठनात्मक कार्रवाई की जाए। अब पूरे मामले में पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के जवाब पर निगाहें टिकी हैं। घटनास्थल के वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
सवाल साफ है- क्या जनहित की खबर दिखाने वाले पत्रकार को अपना काम करने के दौरान दबाव और कथित दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ेगा? लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध और प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से अपना दायित्व निभाने देना भी उतना ही जरूरी है। आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और तथ्य सामने आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाए, यही इस मामले में अपेक्षित है।