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आस्था का चमत्कार: असाध्य रोगों से मिली मुक्ति, भक्तों ने लोटन यात्रा निकाल महामाया आवरी माताजी का जताया आभार ढोल-ढमाकों और "जय माता दी" के जयकारों से गूंजा आवरी माता का दरबार चीताखेड़ा । आरोग्य दायिनी जगत जननी महामाया आवरी माताजी के दरबार में अटूट आस्था और चमत्कार का अनूठा दृश्य देखने को मिला। असाध्य रोगों और गंभीर शारीरिक पीड़ा से मुक्ति मिलने पर दो भक्तों ने अपनी मनोकामना पूर्ण होने के बाद जमीन पर लोटन यात्रा करते हुए मां के दरबार में हाजिरी लगाई। एक ने अपनी छोटी बहन की सेहत के लिए 2 किलोमीटर तो दूसरे ने अपनी मां के लकवाग्रस्त शरीर के स्वस्थ होने पर 4 किलोमीटर की कठिन लोटन यात्रा पूरी कर माता रानी की चौखट पर शीश नवाया। केस नंबर एक जब डॉक्टरों ने खड़े किए हाथ, मां आवरी के आशीर्वाद से बहन हुई पूरी तरह स्वस्थ चीताखेड़ा निवासी अंजली (पिता राकेश परमार) की छोटी बहन आंचल विगत 6 माह से गंभीर शारीरिक व्याधि से जूझ रही थी। कई बड़े अस्पतालों और डॉक्टरों के चक्कर काटने के बाद भी जब स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ, तो पूरा परिवार मानसिक व आर्थिक रूप से टूट गया। थक-हारकर परिजनों ने महामाया आवरी माताजी की शरण ली और स्वस्थ होने की मन्नत मांगी। मां के चमत्कार से मात्र एक महीने में ही आंचल की समस्त पीड़ा दूर हो गई और वह पूरी तरह निरोगी हो गई। मन्नत पूरी होने पर बड़ी बहन अंजली ने शनिवार सुबह 5:30 बजे चीताखेड़ा के कारा बावजी चौक स्थित अपने निवास से लोटन यात्रा शुरू की। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच अंजली ने करीब 6.5 घंटे की कठिन साधना के बाद 2 किलोमीटर लोट लगाते हुए आवरी माता के दरबार पहुंचकर मत्था टेका और मन्नत उतारी। * केस नंबर दो विगत 6 महीने से बिस्तर पर थीं पार्वती बाई, बेटे ने 4 किमी लोटन यात्रा कर जताया आभार ग्राम नायनखेड़ी निवासी श्रीमती पार्वती बाई (पति सालिगराम पाटीदार) पिछले छह महीनों से पक्षाघात (लकवा) की शिकार थीं। उनके शरीर के आधे हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था और वे हिलने-डुलने तक में असमर्थ थीं। काफी इलाज के बावजूद कोई राहत नहीं मिली। अंततः परिवार ने आरोग्य देवी आवरी माता से अरदास लगाई। माता रानी की असीम कृपा से पार्वती बाई मात्र एक महीने में ही पूरी तरह स्वस्थ होकर चलने-फिरने लगीं। मां के इस अद्भुत चमत्कार से अभिभूत होकर बेटे भगतराम पाटीदार ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। उन्होंने नायनखेड़ी स्थित अपने घर से सुबह 7 बजे लोटन यात्रा प्रारंभ की और करीब साढ़े पांच घंटे में 4 किलोमीटर की दूरी जमीन पर लोटते हुए पूरी कर दोपहर 12:30 बजे माताजी के मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने मां के चरणों में शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं की इस अटूट भक्ति और लोटन यात्रा के दौरान पूरे रास्ते माता के जयकारों की गूंज रही और ग्रामीण भक्तों के इस समर्पण को देखकर भाव-विभोर हो उठे। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |