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सेवा संकल्प अभियान।।।।।।कहानी बदलाव की आगर-मालवा : जिला चिकित्सालय आगर-मालवा में एक अत्यंत कम वजन के साथ समय पूर्व जन्मे शिशु के सफल उपचार की प्रेरक कहानी सामने आई है। दिनांक 13 अगस्त 2026 को पाखिजा पति बबलू के 980 ग्राम वजन के नवजात शिशु को अत्यंत गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। भर्ती के समय शिशु को एक्सट्रीमली लो बर्थ वेट (ELBW), प्रीटर्म बेबी, रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (RDS), शॉक एवं सियानोसिस की स्थिति थी तथा ऑक्सीजन सैचुरेशन मात्र 30 प्रतिशत था।जिला चिकित्सालय के शिशु रोग विशेषज्ञ द्वारा शिशु को तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट पर लेकर सतत निगरानी में उपचार प्रारंभ किया गया। उपचार के दौरान एप्निया के एपिसोड होने पर स्टिम्युलेशन एवं सक्शन के माध्यम से सम्हाला गया तथा लगभग 20 दिवस तक सीपीएपी (CPAP) सपोर्ट दिया गया। माता-पिता द्वारा आर्थिक कठिनाई के कारण उच्च संस्था में न जा पाने की स्थिति में जिला चिकित्सालय की टीम पर विश्वास व्यक्त किया, जिसे टीम ने पूरी निष्ठा के साथ निभाया। डॉ. रिचा सागरिया एवं डॉ. विजय सागरिया के नेतृत्व में नर्सिंग ऑफिसर्स सुश्री कविता नांदिया, पल्लवी, पूनम दिवाकर, वीणा राठौर, प्रीति पालीवाल, मुस्कान, पूनम कबीर, हर्षिता ठाकुर, जिज्ञासा एवं रोशनी सहित पूरी टीम ने समन्वित प्रयास से शिशु की सतत देखभाल की।निरंतर 37 दिवस के उपचार के पश्चात 18 सितम्बर 2026 को शिशु पूर्णतः स्वस्थ होकर ऑक्सीजन सपोर्ट से मुक्त हुआ तथा सामान्य वाइटल पैरामीटर्स के साथ अपनी माता की गोद में कटोरी-चम्मच से दुग्धपान करने लगा। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की सुदृढ़ व्यवस्थाओं तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्परता से एक नन्ही सी जान को नया जीवन मिला है। यह सफलता जिला चिकित्सालय की उन्नत नवजात शिशु देखभाल सेवाओं का प्रमाण है। |