रतलाम/धार। रतलाम जिले के सरवन निवासी डॉ. सागर सेन ने अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और शोध क्षमता के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम गौरवान्वित किया है। महाराजा भोज शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धार में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत डॉ. सागर सेन का विश्वस्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए चयन हुआ है। उन्हें पोलैंड के क्राको स्थित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सिंक्रोट्रॉन विकिरण केंद्र सोलारिस में अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रयोग करने का अवसर मिला है।
सेरिक-एरिक की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत दुनिया के विभिन्न देशों से प्राप्त शोध प्रस्तावों में डॉ. सेन के शोध प्रस्ताव का चयन किया गया है। उनका चयनित प्रयोग 30 सितंबर से 5 अक्टूबर 2026 तक सोलारिस के पीआईआरएक्स वैज्ञानिक उपकरण पर किया जाएगा। इस अंतरराष्ट्रीय शोध यात्रा के दौरान यात्रा एवं आवास संबंधी खर्च सेरिक-एरिक संघ द्वारा समर्थित किया जाएगा।
दुनिया के वैज्ञानिकों के बीच शोध प्रस्ताव का चयन
सेरिक-एरिक द्वारा विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों से शोध प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं। इन प्रस्तावों का अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की समिति द्वारा शोध की गुणवत्ता, वैज्ञानिक महत्व और उपयोगिता के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। इसी कठिन और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया में डॉ. सेन के शोध प्रस्ताव का चयन होना उनकी वैज्ञानिक क्षमता और शोध की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाता है।
आयन किरणों से बदलेंगे चुंबकीय पदार्थों के गुण
डॉ. सेन के चयनित शोध का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि विशेष प्रकार की आयन किरणों का उपयोग करके बहुत पतली चुंबकीय परतों के गुणों में किस प्रकार बदलाव किया जा सकता है। वैज्ञानिक यह अध्ययन करेंगे कि किसी पदार्थ पर विशेष आयन किरणें डालने से उसके चुंबकीय गुण और व्यवहार को आवश्यकता के अनुसार बदला जा सकता है या नहीं।
इस शोध के परिणाम भविष्य में मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग होने वाली स्मृति इकाइयों और संवेदकों को छोटा, तेज और अधिक प्रभावी बनाने में उपयोगी हो सकते हैं। साथ ही कम बिजली की खपत करते हुए अधिक जानकारी सुरक्षित रखने वाली तकनीकों के विकास में भी इसका योगदान संभव है।
जर्मनी के डीईएसवाई के बाद अब पोलैंड में नई उपलब्धि
डॉ. सागर सेन इससे पहले जर्मनी के प्रतिष्ठित डीईएसवाई वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र में भी शोध कार्य कर चुके हैं। वहां उन्होंने अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करते हुए पतली फिल्मों और उन्नत पदार्थों से संबंधित अध्ययन किया था। अब पोलैंड के सोलारिस अनुसंधान केंद्र में प्रस्तावित प्रयोग उनके अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध की अगली महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
इसके अलावा डॉ. सेन को यूजीसी-डीएई वैज्ञानिक अनुसंधान संघ, इंदौर से भी शोध परियोजना की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इस परियोजना में आयन किरणों के प्रभाव से पतली चुंबकीय फिल्मों में होने वाले संरचनात्मक एवं चुंबकीय बदलावों का अध्ययन किया जा रहा है।
रतलाम (सरवन) से विश्वस्तरीय वैज्ञानिक मंच तक पहुंच
रतलाम जिले के सरवन जैसे क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रतिष्ठित मंच तक पहुंचना डॉ. सागर सेन की उपलब्धि को और खास बनाता है। उनकी यह सफलता क्षेत्र के विद्यार्थियों और युवाओं के लिए भी प्रेरणादायक है। एक ओर धार के शासकीय महाविद्यालय में अध्यापन करते हुए शोध कार्य को आगे बढ़ाना और दूसरी ओर जर्मनी के डीईएसवाई तथा अब पोलैंड के सोलारिस जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक केंद्रों में शोध का अवसर मिलना उनकी निरंतर वैज्ञानिक सक्रियता को दर्शाता है।
यूजीसी-डीएई सीएसआर इंदौर से शोध परियोजना की स्वीकृति, जर्मनी के डीईएसवाई में शोध कार्य और अब पोलैंड के सोलारिस में अत्याधुनिक प्रयोग के लिए चयन डॉ. सेन की वैज्ञानिक उपलब्धियों की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं।
डॉ. सागर सेन की बाइट (प्रेस/मीडिया वक्तव्य)
पोलैंड के सोलारिस राष्ट्रीय सिंक्रोट्रॉन अनुसंधान केंद्र में मेरे शोध प्रस्ताव का चयन होना मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि और गर्व का विषय है।
इस शोध के माध्यम से आयन किरणों के प्रभाव से पतली चुंबकीय फिल्मों में होने वाले संरचनात्मक एवं चुंबकीय बदलावों को समझने का प्रयास किया जाएगा। सोलारिस जैसी अत्याधुनिक वैज्ञानिक सुविधा में प्रयोग से प्राप्त आंकड़े मेरे शोध को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
मेरे लिए यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है, क्योंकि मैं रतलाम जिले के सरवन अंचल से आता हूं। जर्मनी के प्रतिष्ठित DESY अनुसंधान केंद्र में शोध कार्य करने के बाद अब पोलैंड के SOLARIS में अत्याधुनिक प्रयोग के लिए चयनित होना मेरे लिए गौरव की बात है।
हमारे आदिवासी अंचल और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें उचित मार्गदर्शन, अवसर और प्रोत्साहन देने की है। मैं चाहता हूं कि हमारे क्षेत्र के विद्यार्थी और युवा विज्ञान, उच्च स्तरीय अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंचों के बारे में जागरूक हों तथा इन क्षेत्रों में आगे बढ़कर देश और दुनिया में अपनी पहचान बनाएं।
मेरा प्रयास रहेगा कि मेरी यह उपलब्धि हमारे क्षेत्र के बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने और उन्हें यह विश्वास मिले कि छोटे शहर और ग्रामीण अंचल से निकलकर भी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक मंचों तक पहुंचा जा सकता है।
डॉ. सागर सेन की इस उपलब्धि से सरवन, रतलाम जिले और मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ा है। साथ ही महाराजा भोज शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, धार के लिए भी यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक भी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान में अपनी प्रभावी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत