सीतामऊ/मंदसौर। जिले की सीतामऊ तहसील के ग्राम मामादेव में पैतृक जमीन के नामांतरण को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि ग्राम मामादेव स्थित खसरा नंबर 145 की करीब 20 बीघा पैतृक भूमि के रिकॉर्ड में कथित रूप से हेराफेरी कर जीवित हिस्सेदारों के नाम हटाए गए और परिवार के ही असलम खान ने अपने मृत एवं निसंतान चाचा स्व. अजीज खान का पुत्र बनकर विवादित जमीन में नामांतरण करा लिया। परिवार का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया महज 7 दिनों के भीतर पूरी कर दी गई।
मामले को लेकर जावेद खान पिता अजबनूर खान, इकबाल खान पिता मोहम्मद खान सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने मंदसौर कलेक्टर को शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, कथित फर्जी नामांतरण निरस्त करने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है।
20 बीघा जमीन से शुरू हुआ पूरा विवाद
आवेदन के अनुसार ग्राम मामादेव स्थित खसरा नंबर 145 का कुल रकबा करीब 20 बीघा है और यह परिवार की संयुक्त पैतृक संपत्ति रही है। परिवार का कहना है कि पूर्व में तीन भाइयों ने अपने-अपने हिस्से की 4-4 बीघा यानी कुल 12 बीघा भूमि का वैधानिक रूप से विक्रय कर दिया था। इसके बाद बची भूमि में स्व. अजीज खान सहित अन्य हिस्सेदारों के अधिकार बने हुए थे।
परिवार के अनुसार स्व. अजीज खान पिता शहादत खान का वर्ष 2021 में निधन हो चुका है और वे निसंतान थे। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनकी मृत्यु के बाद उनके हिस्से का उत्तराधिकार नियमानुसार उनके वैधानिक वारिसों को मिलना था, लेकिन इसी बीच परिवार के ही असलम खान द्वारा कथित तौर पर स्वयं को स्व. अजीज खान का पुत्र दर्शाते हुए नामांतरण कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
SLC और नामावली को बताया अहम सबूत
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि असलम खान वास्तव में अजबनूर खान का पुत्र है और वह जावेद खान, आरिफ खान, आबिद खान, आशिक खान तथा शाहिद खान का सगा भाई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (SLC), नामावली तथा अन्य दस्तावेजों के आधार पर असलम खान के वास्तविक पिता का नाम अजबनूर खान होने की बात सामने आती है।
परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद दस्तावेजों में स्व. अजीज खान को पिता दर्शाकर कथित रूप से नामांतरण कराया गया। शिकायतकर्ताओं ने इस पूरे मामले को दस्तावेजी जांच का विषय बताते हुए प्रशासन से रिकॉर्ड की गहन जांच कराने की मांग की है।
बिना सूचना जीवित हिस्सेदारों के नाम हटाने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप राजस्व रिकॉर्ड को लेकर लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि खसरे में दर्ज अन्य जीवित हिस्सेदारों को कथित तौर पर कोई वैधानिक सूचना या पर्याप्त अवसर दिए बिना उनके नाम रिकॉर्ड से हटा दिए गए। इसके बाद महज सात दिनों में असलम खान का नाम स्व. अजीज खान के पुत्र के रूप में दर्ज किए जाने का आरोप है।
पीड़ितों का कहना है कि नामांतरण के बाद असलम खान ने विवादित करीब 4 बीघा भूमि को इंदौर निवासी मुर्तुजा बड़नगरवाला एवं मुस्तफा बड़नगरवाला पिता अख्तर हुसैन के पक्ष में विक्रय कर दिया।
शिकायतों के बावजूद नामांतरण होने पर उठे सवाल
परिवार के अनुसार इस पूरे मामले की जानकारी पहले ही पटवारी, नायब तहसीलदार और तहसीलदार को लिखित रूप से दी जा चुकी थी। इतना ही नहीं, थाना सीतामऊ में आपराधिक शिकायत, SDO न्यायालय में अपील तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन आपत्तियों और शिकायतों के बावजूद विवादित नामांतरण राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया गया। इसी को लेकर अब परिवार ने जिला प्रशासन से सवाल किया है कि जब जमीन को लेकर विवाद और आपत्तियां पहले से अधिकारियों के संज्ञान में थीं तो इतनी तेजी से नामांतरण की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई?
सिविल कोर्ट में मामला लंबित होने का भी दावा
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्व. अजीज खान की अन्य भूमि के स्वामित्व एवं असलम खान द्वारा कथित फर्जीवाड़े को लेकर सिविल न्यायालय में मामला पहले से लंबित है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद राजस्व अधिकारियों द्वारा नामांतरण की कार्रवाई की गई।
हालांकि इस संबंध में अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित न्यायालय एवं राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यही कारण है कि पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
तिरंगा लेकर निकली न्याय यात्रा
मामले में कार्रवाई नहीं होने से नाराज पीड़ित परिवार सीतामऊ के लदुना चौराहे से हाथों में तिरंगा लेकर मंदसौर कलेक्टर कार्यालय की ओर न्याय यात्रा पर रवाना हुआ। परिवार का कहना है कि वे प्रशासन के समक्ष अपनी जमीन और कथित फर्जी नामांतरण का पूरा रिकॉर्ड प्रस्तुत कर न्याय की मांग कर रहे हैं।
परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें उचित सुनवाई नहीं मिली तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। आवेदन में आमरण अनशन/आत्मबलिदान जैसे कदम का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे बयान को देखते हुए प्रशासन के लिए यह मामला केवल राजस्व विवाद नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और शिकायत के त्वरित निराकरण की दृष्टि से भी गंभीर बन गया है।
कलेक्टर से तीन बड़ी मांगें
पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से मांग की है कि कथित अनियमितता से किए गए नामांतरण को तत्काल निरस्त किया जाए। असलम खान एवं कथित रूप से शामिल अन्य लोगों के खिलाफ दस्तावेजों की जांच कर दोष सिद्ध होने पर FIR दर्ज कराई जाए। साथ ही संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने पर निलंबन सहित कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
इन लोगों ने की शिकायत
शिकायत में आवेदक के रूप में जावेद खान, आरिफ खान, आबिद खान, आशिक खान, शाहिद खान, मोहम्मद खान, इकबाल खान, इमरान खान, इरफान खान, नूरबनो बी, आदिल खान और फिरोज खान के नाम दर्ज हैं।
मामले में अब सबकी नजर मंदसौर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि प्रशासन द्वारा राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण फाइल, नोटिस प्रक्रिया, दस्तावेजों और कथित पिता-पुत्र संबंध की जांच कराई जाती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर 20 बीघा पैतृक भूमि के रिकॉर्ड में इतनी बड़ी प्रक्रिया महज सात दिनों में कैसे पूरी हुई और जीवित हिस्सेदारों के नाम किस आधार पर हटाए गए।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत