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DSO की मौखिक अनुमति का हवाला, नियमों को ताक पर रखकर खरीदी मुख्यमंत्री की सख्ती के बीच खरीदी घोटाला सामने आया सुसनेर: समीप ग्राम खजुरी में सरकारी गेहूं खरीदी व्यवस्था में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। कार्यपालक मजिस्ट्रेट अरुण चंद्रवंशी द्वारा की गई छापामार कार्रवाई में एक अवैध खरीदी केंद्र पकड़ा गया, जो नियमों को दरकिनार कर निजी मकान के बाहर संचालित किया जा रहा था। इस कार्रवाई ने न केवल स्थानीय स्तर पर चल रही अनियमितताओं को उजागर किया है। बल्कि पूरी खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम खजुरी में गायत्री स्व सहायता समूह द्वारा बिना किसी अधिकृत अनुमति के गेहूं खरीदी की जा रही थी। हैरानी की बात यह रही कि खरीदी केंद्र किसी शासकीय परिसर या निर्धारित स्थल पर नहीं बल्कि एक निजी घर के बाहर संचालित हो रहा था। जब प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो वहां बड़े पैमाने पर गेहूं का भंडारण और परिवहन गतिविधियां चलती हुई पाई गईं। छापेमारी के दौरान करीब 500 से अधिक नए सरकारी गेहूं से भरे बोरे मौके से बरामद किए गए। इसके अलावा लगभग 250 खाली सरकारी बारदान भी पाए गए जो यह संकेत देते हैं कि यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर खरीदी का कार्य किया जा रहा था। मौके पर 3 से 4 ट्रैक्टर गेहूं से लदे खड़े मिले जिससे स्पष्ट होता है कि किसानों से लगातार खरीदी की जा रही थी और इसे व्यवस्थित रूप से आगे भेजने की तैयारी थी। जांच में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि संबंधित संस्था को ग्राम खजुरी में खरीदी करने की कोई आधिकारिक अनुमति प्राप्त नहीं थी। सूत्रों के अनुसार, संस्था को सुसनेर क्षेत्र में खरीदी की अनुमति दी गई थी। लेकिन वहां स्लॉट बुक कराकर लगभग 7 किलोमीटर दूर खजुरी में समानांतर रूप से अवैध खरीदी केंद्र संचालित किया जा रहा था। इस दौरान सुसनेर के एक निजी वेयरहाउस में सीमित मात्रा में खरीदी दिखाकर प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास भी किया जा रहा था। पूरे मामले में जिला खाद्य अधिकारी (DSO) की कथित मौखिक अनुमति का हवाला दिया जा रहा है। जिससे इस घोटाले की गंभीरता और बढ़ गई है। बिना किसी लिखित आदेश या स्वीकृति के इस प्रकार बड़े स्तर पर खरीदी का संचालन होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। एक और गंभीर पहलू यह है कि खरीदी के दौरान गेहूं की गुणवत्ता जांच के लिए कोई अधिकृत सर्वेयर मौजूद नहीं था। ऐसे में किसानों से खरीदे गए गेहूं की गुणवत्ता किस आधार पर तय की जा रही थी। यह भी जांच का विषय बन गया है। इस अवैध खरीदी में किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका रही है। इसकी भी पड़ताल की जा रही है। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि जिन किसानों ने इस केंद्र पर अपना गेहूं बेचा उन्हें भुगतान किस प्रकार किया जाएगा और कहीं वे आर्थिक नुकसान का शिकार तो नहीं होंगे। इसके साथ ही जब्त किए गए गेहूं का आगे क्या किया जाएगा, यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है। गौरतलब है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार गेहूं खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए सख्त निर्देश दे रहे हैं तथा स्वयं खरीदी केंद्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। ऐसे में उनके ही गृह संभाग क्षेत्र में इस प्रकार की गंभीर लापरवाही और अनियमितता सामने आना प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जिम्मेदारों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही जा रही है। अब देखना होगा कि इस बड़े घोटाले में शामिल दोषियों पर कब तक कार्रवाई होती है और किसानों को न्याय कैसे मिल पाता है। इनका कहना:- खजुरी में बिना अनुमति के गेहूं खरीदी केंद्र संचालित होने की सूचना पर छापामार कार्रवाई की गई। मौके से बड़ी मात्रा में गेहूं और सरकारी बारदान बरामद किया गया है। प्रथम दृष्टया नियमों का उल्लंघन पाया गया है। मामले की जानकारी जिला प्रशासन को भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई जारी है। अरुण चंद्रवंशी कार्यपालक मजिस्ट्रेट सुसनेर रिपोर्ट : अर्पित हरदेनिया |