रतलाम। शहर में विकास के दावों और जमीनी जरूरतों के बीच अंतर को उजागर करते हुए समाजसेविका सीमा टाक ने मुख्य बाजार क्षेत्रों में महिलाओं के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित सुविधाघर की कमी का मुद्दा उठाया है। उन्होंने महापौर से सवाल किया है कि जब शहर के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जा रहे हैं, तो चांदनी चौक, चौमुखी पुल और तोपखाना जैसे प्रमुख बाजारों में खरीदारी के लिए आने वाली महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधा क्यों उपलब्ध नहीं है?
सीमा टाक ने कहा कि रतलाम के मुख्य बाजारों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं खरीदारी करने पहुंचती हैं। कई महिलाओं को बाजार में घंटों समय बिताना पड़ता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उनके लिए स्वच्छ और सुरक्षित महिला सुविधाघर उपलब्ध नहीं होना गंभीर समस्या है। यह केवल सुविधा का सवाल नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा, निजता और स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि शहर में सड़कें बनाना, नालियों का निर्माण करना और अन्य विकास कार्य कराना जरूरी है, लेकिन विकास का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होता है, जब आम नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए। बाजार में आने वाली किसी महिला को यदि बुनियादी शौचालय सुविधा के लिए परेशान होना पड़े, तो विकास के दावों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पहले भी दिया पत्र, फिर भी समाधान का इंतजार
समाजसेविका सीमा टाक ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर पहले भी महापौर को विस्तार से पत्र देकर ध्यान आकर्षित कराया था। इसके बावजूद उनका कहना है कि इस महत्वपूर्ण जरूरत का समाधान अब प्राथमिकता से किया जाना चाहिए। उन्होंने महापौर से आग्रह किया कि मामले को केवल शिकायत मानकर नजरअंदाज न किया जाए, बल्कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर बाजार के प्रमुख स्थानों पर स्वच्छ, सुरक्षित और महिलाओं के लिए सुविधाजनक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
नारी सम्मान से मापा जाए शहर का विकास
सीमा टाक ने कहा कि विकास केवल सड़कों, नालियों और इमारतों तक सीमित नहीं होना चाहिए। शहर की महिलाओं को सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी नगर निगम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने महापौर से अपील की कि रतलाम की बहन-बेटियों की इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ठोस कदम उठाएं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति के विरोध का विषय नहीं है, बल्कि महिलाओं की गरिमा और बुनियादी अधिकारों से जुड़ा सवाल है। अब देखना होगा कि नगर निगम इस मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाता है और शहर के प्रमुख बाजारों में महिला सुविधाघरों की व्यवस्था कब तक सुनिश्चित की जाती है।
रिपोर्ट ईश्वर टांक
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत