रतलाम / रावटी । हाईवे पर सुरक्षित और सुगम सफर का दावा करने वाली सड़क व्यवस्था की जमीनी हकीकत कई स्थानों पर चिंता बढ़ा रही है। फोरलेन पर जगह-जगह खुले अवैध कट और ग्रामीण क्षेत्रों में अमानक तरीके से बनाए गए स्पीड ब्रेकर वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बन रहे हैं। स्थिति यह है कि कई स्पीड ब्रेकरों पर सफेद पट्टियां तक नहीं हैं और न ही पर्याप्त चेतावनी संकेतक दिखाई देते हैं। ऐसे में दिन के समय भी वाहन चालकों को परेशानी होती है, जबकि रात के अंधेरे में ये स्पीड ब्रेकर अचानक सामने आने पर गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं।
डिवाइडर पार कर निकल रहे वाहन, हर वक्त टक्कर का खतरा
फोरलेन पर अवैध कट यातायात सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इन कटों से वाहन चालक डिवाइडर पार कर एक तरफ से दूसरी तरफ निकल जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल पंप, होटल और खेतों तक पहुंचने के लिए कई लोग ट्रैक्टर सहित अन्य वाहनों का उपयोग करते हैं। इस दौरान तेज गति से गुजर रहे वाहनों के सामने अचानक दूसरा वाहन आ जाने से टक्कर की आशंका बनी रहती है। खासकर भारी वाहनों और तेज रफ्तार से चलने वाले यातायात के बीच ऐसे कट जानलेवा साबित हो सकते हैं।
बैठकों में निर्देश, लेकिन जमीनी अमल पर सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता रेणुका पोरवाल ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में निर्णय लिए जाते हैं और संबंधित विभागों को निर्देश भी दिए जाते हैं, लेकिन इन पर पूरी तरह अमल नहीं हो पाता। उन्होंने बताया कि कुछ माह पहले प्रशासनिक बैठकों में अवैध कट बंद करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद कुछ स्थानों पर कार्रवाई भी हुई, लेकिन अब भी कई जगह अवैध कट खुले हुए हैं।
पोरवाल के अनुसार, अवैध कटों के आसपास व्यवसाय करने वाले लोगों को भी नियमों और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हुए आवश्यक चेतावनी दी जानी चाहिए, ताकि अनधिकृत रास्तों से होने वाले जोखिम को कम किया जा सके।
अमानक स्पीड ब्रेकर भी बन रहे परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह बनाए गए अमानक स्पीड ब्रेकर भी वाहन चालकों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं बने स्पीड ब्रेकरों पर सफेद पट्टियां और चेतावनी संकेतक नहीं होने से वाहन चालकों को समय रहते उनकी जानकारी नहीं मिल पाती। अचानक ब्रेक लगाने से पीछे चल रहे वाहनों के टकराने का खतरा रहता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी ऐसे स्पीड ब्रेकर जोखिम बढ़ा सकते हैं।
सड़क सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है कि स्पीड ब्रेकरों का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। उन पर स्पष्ट सफेद पट्टियां बनाई जाएं और जरूरत के अनुसार पहले से चेतावनी संकेतक लगाए जाएं, ताकि वाहन चालक समय रहते गति नियंत्रित कर सकें।
जिम्मेदार विभाग कब करेगा स्थायी समाधान?
अब जरूरत केवल निर्देश जारी करने की नहीं, बल्कि नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई की है। संबंधित विभाग और सड़क निर्माण एजेंसी को हाईवे के अवैध कटों की पहचान कर नियमानुसार उन्हें बंद करने, आवश्यक स्थानों पर सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करने और अमानक स्पीड ब्रेकरों को दुरुस्त कराने की जरूरत है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में लिए गए निर्णयों का धरातल पर कितना असर हो रहा है?अवैध कटों पर पूरी तरह नियंत्रण कब होगा? स्पीड ब्रेकरों पर सफेद पट्टियां और चेतावनी संकेतक कब लगाए जाएंगे? क्या जिम्मेदार विभाग समय रहते व्यवस्था दुरुस्त करेगा या फिर किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई की गति बढ़ेगी?
सड़क सुरक्षा केवल बैठकों और निर्देशों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। समय रहते ठोस कदम उठाना जरूरी है, ताकि लापरवाही और अव्यवस्थित यातायात के कारण किसी परिवार को अपनों को खोने का दर्द न झेलना पड़े।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत