मंदसौर/ पिपल्याजोधा सुरेश डांगी केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 की अफीम नीति घोषित नहीं किए जाने से नाराज अफीम किसानों ने गुरुवार को मंदसौर में नारेबाजी करते हुए विशाल रैली निकाली। किसान नेता श्यामलाल जोकचन्द के नेतृत्व में किसान सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे पर एकत्रित हुए और यहां से पैदल मार्च करते हुए जिला अफीम अधिकारी कार्यालय पहुंचे। किसानों ने कार्यालय का घेराव कर जिला अफीम अधिकारी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसान नेता जोकचन्द ने चेतावनी दी कि यदि पांच दिन के भीतर अफीम नीति घोषित नहीं की गई तो किसान बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अफीम उत्पादक किसान शामिल हुए किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जल्द अफीम नीति घोषित करने की मांग की। जिला अफीम अधिकारी से चर्चा के दौरान किसान नेता जोकचन्द ने नीति घोषित करने में हो रही देरी को लेकर जवाब मांगा। इस पर अधिकारी ने कहा कि किसानों का ज्ञापन उच्च अधिकारियों को भेज दिया जाएगा केंद्रीय वित्त मंत्रालय से जो भी आदेश प्राप्त होंगे, उनके अनुसार अफीम नीति का पालन कराया जाएगा
चित्तोड़गढ़ सांसद के बयान पर भी उठाए सवाल
चर्चा के दौरान किसान नेता जोकचन्द ने चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी के उस कथित बयान को लेकर सवाल उठाया, जिसमें किसानों से 10 आरी के अफीम पट्टे पर खेती करने की बात कही जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि सांसद किसानों को अफीम की बुवाई करने की बात कह रहे हैं, तो क्या किसान उनके बयान के आधार पर फसल बो दें ? इस पर जिला अफीम अधिकारी ने किसानों से कहा कि वे सांसद के बहकावे में नहीं आएं और अफीम नीति घोषित होने तक फसल की बुवाई न करें,अन्यथा कार्रवाई हो सकती है। किसान नेता जोकचन्द ने कहा कि एक माह बीत जाने के बावजूद केंद्र सरकार अफीम नीति घोषित नहीं कर पाई है। इससे किसान असमंजस में हैं और आगामी फसल की तैयारी प्रभावित हो रही है। उन्होंने केंद्र सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि नीति में देरी होने से फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा किसानों को निर्धारित औसत पूरी करने में भी परेशानी आ सकती है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की आर्थिक व्यवस्था काफी हद तक अफीम की खेती पर निर्भर है, लेकिन सरकार की नीतियों के कारण किसानों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने नारकोटिक्स अधिकारियों पर आरोप लगाया कि मॉर्फिन की मात्रा कम बताकर अफीम पट्टे काटने की धमकी दी जाती है और किसानों से अवैध वसूली की जाती है। ये आरोप किसान नेता ने प्रदर्शन के दौरान लगाए
ज्ञापन में रखीं प्रमुख मांगें
ज्ञापन का वाचन करते हुए पूर्व सरपंच दिनेश कारपेंटर ने कहा कि अफीम नीति घोषित करने में देरी के कारण किसानों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पट्टा व्यवस्था, अफीम एवं डोडाचूरा के उचित मूल्य और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं से संबंधित समस्याएं भी लंबे समय से लंबित हैं। इन्हीं समस्याओं के निराकरण के लिए 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को सरदार वल्लभभाई पटेल चौराहे से पैदल मार्च निकालकर जिला अफीम अधिकारी कार्यालय का घेराव किया गया ज्ञापन में केंद्र सरकार से वर्ष 2026-27 की अफीम नीति तत्काल घोषित करने, सभी पात्र किसानों को 10 आरी के चिरा पद्धति वाले पट्टे जारी करने तथा वर्ष 1997-98 में काटे गए अफीम पट्टों को पुनः बहाल करने की मांग की गई। इसके साथ ही सीपीएस पद्धति के स्थान पर पारंपरिक चिरा पद्धति से अफीम की खेती के पट्टे देने और नए पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार लाइसेंस जारी करने की मांग भी रखी गई। किसानों ने अफीम का समर्थन मूल्य एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित करने तथा डोडाचूरा की खरीद प्रदेश सरकार द्वारा पूर्ववत किए जाने के साथ उसका मूल्य बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की। ज्ञापन में डोडाचूरा में मॉर्फिन की मात्रा 0.2 प्रतिशत से कम होने की स्थिति में उसे एनडीपीएस एक्ट के दायरे से बाहर करने के लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों में संशोधन करने की मांग भी शामिल रही किसानों ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/29 को समाप्त करने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रावधान का दुरुपयोग कर अवैध वसूली की जाती है इसके अतिरिक्त अफीम की फसल को फसल बीमा योजना में शामिल करने, प्राकृतिक आपदा अतिवृष्टि, ओलावृष्टि एवं प्रतिकूल मौसम से फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक सहायता देने तथा पट्टा संबंधी समस्याओं का शीघ्र निराकरण करने की मांग की गई। किसानों ने कहा कि पट्टा व्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त की जाए, ताकि पात्र किसानों को राहत मिल सके और वे समय पर आगामी फसल की तैयारी कर सकें। ज्ञापन के माध्यम से राष्ट्रपति से आग्रह किया गया कि किसानों की मांगों को केंद्र सरकार एवं संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचाकर उनका शीघ्र निराकरण कराया जाए
इन्होंने रखे विचार
प्रदर्शन के दौरान कृषि उपज मंडी के पूर्व अध्यक्ष बंशीलाल पाटीदार, पूर्व उपाध्यक्ष कमलेश पटेल, महेश गुप्ता, शीतलसिंह बोराना, भरत पाटीदार, भगतराम डाबी, मानसिंह चौहान,मनोहर सोनी, बल्लू गुर्जर, गफ्फारभाई, अमरसिंह गुर्जर मदन वर्मा गोपालसिंह गुर्जर योगेश जोशी, विष्णु दुबे, कुंजीलाल पाटीदार, भूपेन्द्र महावर दिनेश पाटीदार, श्यामलाल लकुम, मीना चौहान ईशु धनगर आदि ने विचार रखे इस अवसर पर रघुवीरसिंह रिछा गजराजसिंह सोनगरा रामेश्वर राठौर, लोकेन्द्रसिंह सोनगरा,रामप्रसाद राठौर, भेरुलाल सूर्यवंशी, सुनील पाटीदार अफसर मंसूरी, रमेश गुर्जर, उदयसिंह दौरवाड़ा, संतोष राठौर, राजेश भारती, रमेश मालवीय, प्रहलाद पंवार, राहुल वर्मा मुकेश शर्मा झिरकन अमृत राम गुजर कृष्णकांत माली, महेश परिहार युसूफ मेव,पंकज बसेर, अमृतराम हाबरिया, अर्जुनसिंह तलाव पिपलिया, जुझारसिंह कामलिया, डॉ फरीद शेख, मुकेश् कुमावत, डॉ. जगदीश मालवीय सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे संचालन योगेश जोशी ने किया आभार शीतलसिंह दौरवाड़ा ने माना