रतलाम/सैलाना। धर्म के प्रति अटूट आस्था, सादगीपूर्ण जीवन और मिलनसार व्यक्तित्व के धनी वरिष्ठ किराना व्यवसायी एवं धर्मनिष्ठ सुश्रावक भंवरलाल संघवी का बीती रात अपने निवास पर आकस्मिक निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से सैलाना नगर में शोक की लहर दौड़ गई। विशेष बात यह रही कि निधन से महज पांच दिन पहले ही उन्होंने मास क्षमण जैसी कठिन तपस्या पूर्ण की थी। धर्म आराधना और तपस्या के बाद सामान्य जीवन की ओर लौट रहे संघवी के अचानक चले जाने से परिजन, समाजजन और परिचित स्तब्ध रह गए। हालांकि, उनके परिजनों ने शोक की इस घड़ी में नेत्रदान का निर्णय लेकर मानवता और परोपकार की ऐसी मिसाल पेश की, जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
भंवरलाल संघवी हंसमुख, मिलनसार और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। सादगी उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा थी। धार्मिक गतिविधियों में उनकी गहरी रुचि थी और हाल ही में उन्होंने मास क्षमण की कठिन तपस्या पूर्ण की थी। तपस्या पूर्ण करने के पांच दिन बाद बीती रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके आकस्मिक निधन से परिवार सहित पूरे जैन समाज में शोक व्याप्त है। वे सुभाष, ज्ञानचंद और महेंद्र संघवी के अग्रज थे।
शोक की घड़ी में नेत्रदान का प्रेरणादायी निर्णय
भंवरलाल संघवी के निधन के बाद परिजनों ने दुख की इस घड़ी में भी दूसरों के जीवन में उजाला लाने का संकल्प लिया। व्यवसायी विशाल भांगू की प्रेरणा से उनके भाई सुभाष, ज्ञानचंद, महेंद्र तथा पुत्र विवेक संघवी ने नेत्रदान के लिए सहमति प्रदान की। इसके बाद तेरापंथ युवक परिषद की ओर से रतलाम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मुथा को सूचना दी गई।
सूचना मिलने पर मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेंद्र सिसोदिया, डॉ. सौरभ पांडे और नर्सिंग ऑफिसर विनोद कुशवाहा सहित टीम ने परिजनों एवं समाजजनों की उपस्थिति में नेत्रदान की प्रक्रिया पूर्ण कराई। परिवार का यह निर्णय इस बात का उदाहरण बना कि किसी अपने को खोने का असहनीय दुख भी परोपकार और मानव सेवा के संकल्प को कमजोर नहीं कर सकता। संघवी का पार्थिव शरीर भले ही पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन नेत्रदान के माध्यम से दूसरों के जीवन में रोशनी पहुंचाने की भावना उनके जीवन को एक नई सार्थकता दे गई।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से दी विदाई
सदर बाजार स्थित उनके निवास से निकली अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में समाजजन, परिचित और गणमान्य नागरिक शामिल हुए। सभी ने नम आंखों से दिवंगत संघवी को अंतिम विदाई दी। मुक्तिधाम पर उनके पुत्र विवेक संघवी ने मुखाग्नि दी।
इसके पश्चात शांतिवन में आयोजित शोक सभा में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इनमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक हर्षविजय गेहलोत, सुधर्म श्रावक संघ अध्यक्ष विजय डोशी, बसंतीलाल संघवी, साधुमार्गी श्रीसंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बदनावर निवासी विजय दसेड़ा, जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक श्रीसंघ अध्यक्ष सुरेंद्र मेहता, जैन धर्मशाला संचालन समिति अध्यक्ष अशोक चंडालिया, शांतिवन जीर्णोद्धार समिति अध्यक्ष राजेंद्र शुक्ला, संजय रांका, पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष जगदीश पाटीदार, वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र त्रिवेदी , डॉ. दीपक जोशी, महेंद्र शुक्ला, दिनेश सोनी, मुकेश पटेल एवं पूर्व पार्षद हेमंत कुमावत सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं।
शोक सभा का संचालन पीयूष जैन ने किया
भंवरलाल संघवी का जीवन धर्म, तपस्या, सादगी और सद्भाव का प्रतीक रहा। उनके निधन से सैलाना ने एक धर्मनिष्ठ वरिष्ठ सुश्रावक को खो दिया, लेकिन उनके परिजनों द्वारा लिया गया नेत्रदान का निर्णय समाज को यह संदेश दे गया कि मानव सेवा ही किसी भी जीवन की सबसे बड़ी सार्थकता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत