रतलाम। आगामी पर्व-त्योहारों की तिथियों को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को दूर करने और व्रत-पर्वों की तिथियों पर सामूहिक निर्णय के उद्देश्य से अस्सी फीट रोड स्थित नारायणी पैलेस में विप्रबंधुओं एवं ज्योतिषाचार्यों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पंचांग गणना के आधार पर गणेशोत्सव सहित आगामी प्रमुख धार्मिक पर्वों की तिथियों और शुभ मुहूर्तों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण तिथियां निर्धारित की गईं।
बैठक में बताया गया कि इस वर्ष गणेशोत्सव सामान्य 11 दिनों के बजाय 12 दिनों का रहेगा। गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को होगी और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ गणेशोत्सव का समापन होगा। गणेश चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:07 बजे प्रारंभ होकर 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। वहीं हरतालिका तीज को लेकर विभिन्न पंचांगों में 13 और 14 सितंबर की तिथि होने से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। बैठक में मातृशक्ति की सुविधा को ध्यान में रखते हुए हरतालिका तीज 13 सितंबर रविवार को मनाने पर सर्वसम्मति बनी। ऋषि पंचमी 15 सितंबर को, राधाष्टमी 19 सितंबर, तेजा दशमी 21 सितंबर तथा जलझूलनी डोल एकादशी 22 सितंबर को मनाई जाएगी।
25 सितंबर को गणेश विसर्जन का विशेष मुहूर्त
अनंत चतुर्दशी के दिन दोपहर 12:24 बजे से 1:55 बजे तक गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए विशेष शुभ मुहूर्त बताया गया है। बैठक में बताया गया कि इस अवधि में शुभ चौघड़िया के साथ अभिजित मुहूर्त का प्रभाव भी आसपास रहेगा। श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया कि निर्धारित समय में भगवान श्री गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना, आरती एवं मंगल प्रार्थना के बाद विसर्जन यात्रा प्रारंभ कर गणपति बप्पा को श्रद्धापूर्वक विदाई दें।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि गणेश प्रतिमा को केवल प्रतीकात्मक रूप से स्थानांतरित कर बाद में सुविधानुसार विसर्जन करने के बजाय निर्धारित शुभ समय में ही पूजा-अर्चना एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ विसर्जन संस्कार को प्राथमिकता दी जाए।
नवरात्रि से दीपावली तक तिथियां तय
बैठक के अनुसार श्राद्ध पक्ष 26 सितंबर से प्रारंभ होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पूर्ण होगा। इसके बाद 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होगी। 18 अक्टूबर को महाअष्टमी, 19 अक्टूबर को महानवमी और 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को रहेगी।
करवा चौथ 29 अक्टूबर, धन्वंतरि जयंती एवं धनतेरस 6 नवंबर, नरक चतुर्दशी 7 नवंबर तथा दीपावली एवं श्री महालक्ष्मी पूजन 8 नवंबर को होगा। गोवर्धन पूजा 9 नवंबर और भाई दूज 11 नवंबर को मनाई जाएगी। देवप्रबोधिनी एकादशी एवं तुलसी विवाह 20 नवंबर, वैकुंठ चतुर्दशी 23 नवंबर तथा कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर को रहेगी।
बैठक में महर्षि संजय शिवशंकर दवे, पं. राजेश शर्मा, पं. योगेश्वर शास्त्री, पं. संजय ओझा, पं. रामगोपाल शर्मा, पं. गोपाल मेहता, पं. बालकृष्ण परसाई, पं. डॉ. महेशानंद शास्त्री, पं. आशीष मिश्रा, पं. राजेश व्यास, पं. मुकेश शर्मा, पं. भूपेंद्र कुमार जोशी, पं. जितेंद्र जोशी, पं. नंदकिशोर उपाध्याय, पं. हेमंत शर्मा, पं. ओआरएस, पं. प्रकाश पुजारी, पं. शैलेंद्र जोशी, पं. ईश्वर व्यास सहित पं. जितेंद्र नगर की विशेष उपस्थिति रही। वैदिक जागृति ज्ञान-विज्ञान पीठ, ज्योतिष शिक्षण जनकल्याण समिति, अखिल भारतीय पुजारी महासंघ एवं त्रिवेणी महारुद्र यज्ञ मंडल से जुड़े विद्वान भी बैठक में शामिल हुए।
विप्रबंधुओं एवं ज्योतिषाचार्यों ने जनमानस से अपील की कि पर्व-त्योहारों की तिथियों को लेकर भ्रम की स्थिति में प्रमाणिक पंचांग एवं सामूहिक रूप से निर्धारित तिथियों का अनुसरण करें, ताकि सभी सनातन पर्व श्रद्धा, आस्था और विधि-विधान के साथ संपन्न हो सकें।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत