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बिना तलाक भारत में दूसरी शादी का आरोप, पाकिस्तानी महिला ने इंदौर हाईकोर्ट में खटखटाया दरवाज़ा इंदौर। पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से जुड़ा एक वैवाहिक विवाद अब इंदौर हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। कराची निवासी पाकिस्तानी महिला निकिता ने अपने पति पर बिना तलाक लिए भारत में दूसरी शादी करने का गंभीर आरोप लगाते हुए इंदौर हाईकोर्ट की शरण ली है। मामले की सुनवाई गुरुवार को हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में हुई, जहां जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की बेंच ने भारत में रह रहे पति विक्रम नागदेव सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इस प्रकरण की अगली सुनवाई 19 जनवरी या उसके कुछ दिन बाद निर्धारित की है। याचिकाकर्ता निकिता वर्तमान में कराची, पाकिस्तान में निवास कर रही है। उसने कोर्ट को बताया कि उसकी शादी 20 जनवरी 2020 को कराची में विक्रम नागदेव के साथ हुई थी। निकिता ने अपने दावे के समर्थन में पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र भी पेश किया है। उसका कहना है कि शादी के कुछ ही महीनों बाद ससुराल पक्ष ने उसे जबरदस्ती पाकिस्तान भेज दिया, जबकि वह अपने पति के साथ रहना चाहती थी। निकिता का आरोप है कि उसका पति विक्रम लॉन्ग टर्म वीजा के आधार पर भारत में रह रहा है और उसने दिल्ली की एक युवती से सगाई कर ली है। इतना ही नहीं, वह आगामी 10 मार्च को दूसरी शादी करने की तैयारी कर रहा है, जबकि उसे अभी तक तलाक नहीं दिया गया है। निकिता ने पति की दूसरी शादी रुकवाने के लिए इंदौर में समाज की पंचायत से भी गुहार लगाई थी। पंचायत द्वारा दोनों पक्षों को सुनने के बाद इंदौर कलेक्टर को पत्र लिखकर विक्रम को देश से बाहर भेजने की सिफारिश की गई थी। जब प्रशासनिक स्तर पर कोई समाधान नहीं निकला, तब मजबूर होकर निकिता ने इंदौर हाईकोर्ट का रुख किया। वहीं दूसरी ओर, विक्रम नागदेव ने अपनी पत्नी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। विक्रम का कहना है कि निकिता अपनी इच्छा से पाकिस्तान लौट गई थी, जबकि वह उसे अपने साथ भारत लाया था। उसने आरोप लगाया कि निकिता उससे पैसों की मांग कर रही है और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। विक्रम के अनुसार, वह अब निकिता को तलाक देना चाहता है। अब यह मामला अंतरराष्ट्रीय वैवाहिक विवाद, वीजा नियमों और वैवाहिक कानूनों से जुड़ने के कारण चर्चा में आ गया है। सबकी निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इस संवेदनशील मामले में आगे क्या कानूनी दिशा तय की जाती है। |