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स्वामी अवधेशानंद गिरि, जूनापीठाधीश्वर की प्रेरणा से एक अनूठी और ऐतिहासिक पहल के तहत समर्पण से संसार पुस्तक द्वारा भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सभी 6 छंदों को पूर्ण रूपेण पीतल पर उकेरा गया है। यह प्रयास राष्ट्रभक्ति, समर्पण और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भक्ति, अभिव्यक्ति और शक्ति का वह स्रोत है जिसने भारत की स्वतंत्रता चेतना को ऊर्जा प्रदान की। इसी राष्ट्रीय भावना की परिणति है कि आज भारत में जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन स्थापित है। त्याग, समर्पण और राष्ट्रप्रेम की भावना को जागृत करने में इस गीत की ऐतिहासिक भूमिका रही है। विशेष उल्लेखनीय है कि लंबे समय तक सामान्य जनमानस की पहुंच केवल इसके प्रथम दो छंदों तक ही सीमित रही, किंतु अब सभी 6 छंदों का पूर्ण रूप में अंकन कर इसे व्यापक जनचेतना से जोड़ा गया है। बुजुर्ग, प्रौढ़, युवा और बाल पीढ़ी — सभी के लिए यह एक प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा। संभवतः यह पहला अवसर है जब वंदे मातरम् के सभी छंदों को 40 गेज पीतल पर उकेरा गया है। प्रयुक्त पीतल की लंबाई 15.5 इंच और चौड़ाई 7 इंच है। इस संपूर्ण कार्य में तीन व्यक्तियों ने कुल 160 मिनट का योगदान दिया। इस पुण्य कार्य का संपूर्ण आर्थिक वहन स्वामी अवधेशानंद गिरि द्वारा किया गया। यह प्रयास राष्ट्रगौरव को सुदृढ़ करने वाला और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। संपादक एड. लोकेश मंगल 9406610239 |