रतलाम
रतलाम की विंध्यवासिनी कॉलोनी कनेरी रोड पर 19 अगस्त की तड़के करीब 3 से 4 बजे ई-स्कूटर में हुए भीषण विस्फोट और आगजनी की घटना ने एक पूरे परिवार की जिंदगी उजाड़ दी। कमरे में सो रही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बिंदु कुंवर और उनकी दो बेटियां आग की चपेट में आ गई थीं। हादसे में गंभीर रूप से झुलसी 16 वर्षीय बेटी अंतिम कुंवर ने 1 सितंबर को इंदौर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, वहीं करीब चार दिन बाद 5 सितंबर को उनकी मां बिंदु कुंवर की भी मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद रविवार 6 सितंबर को मृतका का शव रतलाम पहुंचने पर परिजनों और करणी सेना परिवार ने माणक चौक स्थित लक्ष्मी मंदिर चौराहे पर विरोध प्रदर्शन कर चक्काजाम किया।
चार्जिंग पर नहीं थी स्कूटी, फिर भी हुआ जोरदार ब्लास्ट
परिवार के अनुसार हादसे के समय ई-स्कूटर चार्जिंग पर भी नहीं लगी थी। अचानक बैटरी में विस्फोट हुआ और देखते ही देखते घर आग की लपटों में घिर गया। घर में रखा कूलर, पंखे सहित अन्य सामान जलकर खाक हो गया।
घटना के समय बिंदु कुंवर अपनी दोनों बेटियों अंतिम कुंवर और विजयलक्ष्मी कुंवर के साथ कमरे में सो रही थीं। आग लगने के बाद तीनों ने बाहर निकलने का प्रयास किया। इस दौरान तीनों झुलस गईं। विजयलक्ष्मी ने साहस दिखाते हुए पड़ोसियों की मदद से अपनी मां और बहन को घर से बाहर निकलवाया।
बिंदु कुंवर और अंतिम कुंवर करीब 60 प्रतिशत से अधिक जल गई थीं। पहले उन्हें रतलाम जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में उपचार दिया गया। हालत गंभीर होने पर दोनों को इंदौर रेफर किया गया, जहां अरवीदो और बाद में टी. चोइथराम अस्पताल में उपचार चला। विजयलक्ष्मी को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी।
पहले बेटी ने छोड़ा साथ, फिर मां की भी मौत
हादसे के बाद परिवार लगातार जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा। 16 वर्षीय अंतिम कुंवर, जो सैंडीपानी हायर सेकेंडरी स्कूल विनोबा नगर की कक्षा 12 की छात्रा थीं, ने 1 सितंबर को इंदौर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद 5 सितंबर को उनकी मां बिंदु कुंवर की भी मौत हो गई।
बिंदु कुंवर ग्राम गुनावद, तहसील पेटलावद, जिला झाबुआ में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता थीं। वे तलाकशुदा थीं और अपनी दोनों बेटियों का पालन-पोषण अकेले कर रही थीं। मां-बेटी की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
शव रतलाम पहुंचा तो फूटा आक्रोश, लक्ष्मी मंदिर चौराहे पर चक्काजाम
रविवार को बिंदु कुंवर का शव रतलाम लाया गया। इसके बाद परिजन और करणी सेना परिवार के सदस्य शव को एंबुलेंस में लेकर माणक चौक स्थित लक्ष्मी मंदिर चौराहे पर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों ने ई-स्कूटर कंपनी और संबंधित शोरूम संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई, निष्पक्ष तकनीकी एवं फोरेंसिक जांच और पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की।
मौके पर तहसीलदार कुलभूषण शर्मा, माणक चौक थाना प्रभारी विक्रमसिंह चौहान स्टेशन रोड थाना प्रभारी सहित पुलिस बल मौजूद रहा।
गोविंद काकानी की मध्यस्थता से बनी बात, परिवार को मिले ₹10 लाख
प्रदर्शन के दौरान काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव एवं जिला रोगी कल्याण समिति के सदस्य गोविंद काकानी ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उन्होंने पीड़ित परिवार, कंपनी प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बातचीत कर मामले का समाधान निकालने का प्रयास किया।
गोविंद काकानी ने हादसा होने के बाद उपचार के दौरान भी परिवार की मदद मे ही लगे रहे । रतलाम से लेकर इंदौर तक अस्पताल में भर्ती करवाने और उपचार की व्यवस्था कराने में उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर समन्वय किया। इंदौर में रात करीब 11 बजे अरबिंदो अस्पताल के प्रबंधन और चिकित्सकों से चर्चा कर तत्काल भर्ती की व्यवस्था कराई गई। इसके बाद टी. चोइथराम अस्पताल में भी बेहतर उपचार के लिए सहयोग किया गया। शवपेटी और अंतिम संस्कार से जुड़ी व्यवस्थाओं में भी उन्होंने सहयोग किया।
कंपनी की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया कि मामले में कंपनी की तरफ से जो भी आर्थिक मदद निर्धारित होगी, वह पीड़ित परिवार को उपलब्ध कराई जाएगी। आर्थिक सहायता मिलने और बातचीत के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। इसके बाद परिजन मृतका का शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए रवाना हो गए।
वैरीगो कंपनी पर कार्रवाई और जांच की मांग
परिजनों और करणी सेना परिवार ने दुर्घटनाग्रस्त ई-स्कूटर की कंपनी वैरीगो (Verygo), हरियाणा तथा संबंधित एजेंसी/शोरूम संचालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
परिवार ने मांग की है कि हादसे की उच्चस्तरीय तकनीकी और फोरेंसिक जांच कराई जाए। यदि जांच में वाहन या बैटरी में सुरक्षा संबंधी खामी सामने आती है तो संबंधित मॉडल की बिक्री और वितरण पर रोक लगाई जाए तथा कंपनी से पीड़ित परिवार को उचित क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।
करीब ₹85 हजार में खरीदी थी ई-स्कूटर
परिवार के अनुसार हादसे से करीब 10 दिन पहले ही माणक चौक क्षेत्र स्थित एक शोरूम से करीब ₹85 हजार की ई-स्कूटर खरीदी गई थी। इतनी कम अवधि में वाहन में इस तरह का भीषण विस्फोट होने से ई-स्कूटर की बैटरी और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बची बेटी के भविष्य की चिंता
मां और बहन की मौत के बाद अब परिवार में बची विजयलक्ष्मी कुंवर के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। परिवार की मांग है कि विजयलक्ष्मी को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा उसकी शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनयापन की जिम्मेदारी में सरकार सहयोग करे।
साथ ही बिंदु कुंवर के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पद से संबंधित अनुकंपा नियुक्ति/सहायता दिलाने की मांग भी उठाई गई है, ताकि परिवार की बेटी को भविष्य में आर्थिक सहारा मिल सके।
सरकारी मदद के लिए भी प्रयास जारी
गोविंद काकानी ने कहा है कि वे मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान, स्थानीय विधायक और कलेक्टर से चर्चा कर पीड़ित परिवार को अतिरिक्त आर्थिक सहायता एवं अन्य शासकीय मदद दिलाने का प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि परिवार की स्थिति बेहद दयनीय है और मां-बेटी की मौत के बाद बची बच्ची को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
ईवी वाहनों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि परिवार के अनुसार स्कूटर चार्जिंग पर नहीं लगी थी, इसके बावजूद बैटरी में विस्फोट हुआ। ऐसे में पूरे मामले की तकनीकी जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गोविंद काकानी ने टू-व्हीलर ऑटो गैरेज एसोसिएशन के माध्यम से ईवी वाहनों और बैटरी के सुरक्षित उपयोग को लेकर आम लोगों और मैकेनिकों के लिए सेफ्टी अवेयरनेस वर्कशॉप आयोजित करने की बात भी कही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया जा सके।
एक ई-स्कूटर में हुआ विस्फोट अब सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं रह गया है, बल्कि इसने इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी सुरक्षा, कंपनियों की जवाबदेही और उपभोक्ता सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मां और बेटी की मौत के बाद अब परिवार को न्याय और बची हुई बेटी को सुरक्षित भविष्य दिलाना प्रशासन और संबंधित कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत