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" *कांग्रेस नेता मनीष जैन का पूर्व कैबिनेट मंत्री व विधायक सखलेचा पर तीखा तंज— छात्र को पढ़ाई के लिए जापान भेज सकते हैं, तो गंभीर मरीज को इलाज के लिए कोटा क्यों नहीं? सिंगोली। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सिंगोली के जैन परिवार (मनीष जैन मोहिवाल और लाड बाई) की सड़क दुर्घटना के बाद उचित इलाज के अभाव में हुई असामयिक मौत का मामला अब गहराता जा रहा है। इस हृदय विदारक हादसे ने सिंगोली से लेकर जिला मुख्यालय नीमच तक की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, वेंटिलेटर व एंबुलेंस तंत्र की लाचारी और संवेदनहीनता को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र की जनता और जैन समाज में भारी रोष व्याप्त है। इस गंभीर मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नीमच जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री मनीष जैन ने स्थानीय प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा पर सीधे और गंभीर आरोप लगाए हैं। "*सभ्य जैन समाज की शांति को कमजोरी न समझे प्रशासन* "कांग्रेस नेता मनीष जैन ने बेहद भावुक और आक्रोशित शब्दों में कहा कि, "भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में जैन समाज को सबसे सभ्य, शांत और अहिंसक समाज माना जाता है। यह समाज हमेशा कानून-व्यवस्था का सम्मान करता है।" उन्होंने व्यवस्था की दुखती रग पर हाथ रखते हुए कहा कि, "यदि आज यही दर्दनाक हादसा किसी अन्य उग्र या मुखर समाज के व्यक्ति के साथ हुआ होता, तो अब तक सड़कों पर शव को रखकर चक्काजाम और धरना-प्रदर्शन शुरू हो जाता, और पूरा प्रशासनिक अमला घुटनों के बल माफी मांग रहा होता। लेकिन जैन समाज अपनी सभ्यता और संस्कारों के कारण शांत है, तो इसका यह मतलब कतई नहीं है कि लचर चिकित्सा प्रणाली के चलते उनके अपनों की जान पानी की तरह बहने दी जाए। "*जापान बनाम कोटा: दोहरी नीति पर उठाए सवाल* क्षेत्रीय विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सखलेचा की प्राथमिकताओं पर तंज कसते हुए मनीष जैन ने पूछा, "विधायक जी पिछले ढाई दशक (25 साल) से इस क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी रह चुके हैं। जब आप क्षेत्र के एक विद्यार्थी को मध्य प्रदेश से भी आगे, सीधे पढ़ाई के लिए जापान भेजने का प्रबंध कर सकते हैं और उसकी वाहवाही लूटते हैं, तो फिर सिंगोली के किसी गंभीर और आपातकालीन मरीज को त्वरित इलाज के लिए पड़ोसी शहर कोटा (राजस्थान) रेफर करने में यह दोहरी नीति और जटिल मापदंड क्यों अपनाया जाता है? क्या सिंगोली के नागरिकों की जान इतनी सस्ती है? "*बदले में जनता को क्या मिला*? कांग्रेस नेता ने कहा कि 25 सालों का लंबा कार्यकाल और पूर्व कैबिनेट मंत्री का रसूख किसी भी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं का कायापलट करने के लिए पर्याप्त होता है। परंतु आज भी सिंगोली और नीमच के सरकारी अस्पतालों में केवल बड़ी-बड़ी बिल्डिंगें ही नजर आती हैं, धरातल पर न तो जीवन रक्षक प्रणालियां वेंटिलेटर हैं और न ही पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर व पैरामेडिकल स्टाफ उपलब्ध हैं। साधारण बीमारियों के लिए लोग सरकारी अस्पताल नहीं जाते, लेकिन आपातकालीन स्थिति में भी यदि वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस और ऑक्सीजन न मिले, तो यह बेहद शर्मनाक है। यदि समय पर ये सुविधाएं मिल जातीं, तो आज दोनों जानें बच सकती थीं। *जनता पूछ रही सवाल— आखिर जिम्मेदार कौन*? मनीष जैन ने सीधे शब्दों में शासन और प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए अंतिम सवाल पूछा है कि, "इस खराब और लाचार चिकित्सा प्रणाली के चलते दो मासूम बच्चों के सिर से उनके पिता और दादी का साया छीनने वाली इस मौत का असली जिम्मेदार कौन है? क्या इस लचर सिस्टम की बलि चढ़ने वाले इस जैन परिवार को कभी न्याय मिलेगा?" सिंगोली की आक्रोशित जनता अब केवल खोखले आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है, बल्कि धरातल पर तत्काल ठोस और स्थाई स्वास्थ्य सुधारों तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रही है। रिपोर्ट : दिनेश जी जोशी |