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चीताखेड़ा । स्थानीय जैन समाज के वरिष्ठ जैन समाज पूर्व अध्यक्ष एवं पत्रकार स्वर्गीय रोशनलाल जैन बोहरा की सुपौत्री और कैलाश जैन की सुपुत्री के 11 उपवास कठोर तप की तपस्या निमित्त पूर्ण होने पर परिवार एवं समाज जनों द्वारा तपस्वी के निज निवास स्थान से प्रातः 9:30 से बज ढोल ढमाको के साथ वरघोडा प्रारंभ हुआ । श्री मुनि सुव्रत स्वामी जिनालय के आराधना भवन में चातुर्मास (वर्षावास)हेतु विराजित साध्विवर्या सरल स्वभावी विदुषी परम् पूज्या साध्वी धृति पूर्णा श्रीजी म.सा.मातृ ह्रदया वात्सल्य मूर्ति साध्वी श्री अभय पूर्णा श्री जी म.सा. की पावन निश्रा में इन दिनों जैन श्रावक श्राविकाओं में तप -तपस्या, आयंबिल, भक्ति एवं आराधना की होडा होड मची हुई है। इसी के तहत शनिवार को निकाले वरघोडे में श्रावक श्राविकाएं नाचते झूमते हुए तपस्या करने वाले को धन्यवाद धन्यवाद.......,तपस्वी अमर रहे........., भगवान महावीर की जय जयकार करते हुए चल रहे थे। तपस्वी का वरघोड़ा विभिन्न मार्गों से परिभ्रमण करता हुआ आराधना भवन पहुंचेगा। तपस्वी पायल जैन के भव्य वरघोडे में बड़ी संख्या में जैन -अजैन महिला और पुरुष शामिल थे। वरघोड़े के तत्पश्चात आराधना भवन में तपस्वी पायल जैन का जैन श्री संघ ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा बहुमान किया गया। आराधना भवन में श्राविकाओं ने तपस्या करने का डंका बाजा शरर शरर........, खम्मा घणी खम्मा घणी तपस्वी ने खम्मा घणी......., मेरी झोपडी में भाग्य आज खुल जाएंगे......मधुर गीत से आराधना भवन गुंजायमान कर दिया। आराधना भवन में चातुर्मास हेतु विराजित साध्विवर्या परम् पूज्या साध्वी धृति पूर्णा श्रीजी म.सा.ने धर्म सभा में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को व्याख्यान देते हुए कहा है कि तपस्वी पायल जैन की अनुमोदना के लिए जमीन कंद मूल का त्याग करने का संकल्प लेने को कहा। कंदमूल का त्याग ही तपस्वी की सच्ची अनुमोदना होगी, तप तपस्या ही आत्मा का उद्धार हैं। सूर्यास्त के बाद कभी भोजन नहीं करना चाहिए। तालाब में कमल भी सूर्योदय पर खिलता है और सूर्यास्त के बाद पंखुड़ियों को समेट लेता है। जिनशासन में रात्रि भोजन करना पाप माना गया है। जिसके पश्चात जहां परिवारजन एवं जैन श्री संघ द्वारा पारणा कराया गया। परिवारजनों,रिस्तेनातेदारो एवं जैन श्री संघ द्वारा तपस्वी पायल जैन के तप की खूब खूब अनुमोदना की गई। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |