रतलाम। जिले के आदिवासी अंचलों में जर्जर विद्यालयों और आंगनवाड़ी भवनों की स्थिति को लेकर अब चिंता बढ़ने लगी है।
बारिश के मौसम में भवनों की छतों से पानी टपकने, दीवारों के कमजोर होने और अन्य बुनियादी समस्याओं के चलते नौनिहालों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। इसी गंभीर समस्या को लेकर वाग्धारा संस्था द्वारा गठित कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए रतलाम कलेक्टर को आग्रह पत्र सौंपा और जर्जर भवनों की तत्काल मरम्मत, पुनर्निर्माण तथा आवश्यक होने पर वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की।
संगठन द्वारा किए गए सर्वे में सामने आए आंकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। संगठन के अनुसार बाजना क्षेत्र में 69 विद्यालय और 12 आंगनवाड़ी केंद्र, जबकि सैलाना क्षेत्र में 8 विद्यालय और 7 आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर स्थिति में हैं। बारिश के दौरान इन भवनों में पानी टपकने सहित कई तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा और पोषण सेवाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है।
संगठन ने प्रशासन से मांग की कि जर्जर भवनों का प्राथमिकता के आधार पर तकनीकी निरीक्षण कराया जाए और जिन भवनों में मरम्मत संभव है उनकी तत्काल मरम्मत कराई जाए। वहीं अत्यधिक जर्जर एवं जोखिम वाले भवनों के स्थान पर आवश्यकतानुसार वैकल्पिक भवनों की व्यवस्था अथवा पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को टाला जा सके।
ज्ञापन सौंपने के दौरान संगठन के सदस्यों ने नवनियुक्त रतलाम कलेक्टर अजय जी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर कलेक्टर को आग्रह पत्र के साथ काजू का पौधा भेंट किया गया। वहीं अतिरिक्त कलेक्टर श्री बृजेश रावत को भी काजू का पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
संगठन ने कहा कि विद्यालय और आंगनवाड़ी केंद्र केवल भवन नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के भविष्य की आधारशिला हैं। इन स्थानों पर छोटे बच्चे प्रतिदिन शिक्षा, पोषण और अन्य सेवाओं के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए। संगठन ने जिला प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द जमीनी कार्रवाई शुरू करने की अपेक्षा जताई।
इस अवसर पर रेणुका पोरवाल, कालीबाई डोडियार, कालीबाई डिंडोर, लक्ष्मीबाई चरपोटा, ईश्वर लाल खड़िया, मुकेश भाबर, दिनेश डिंडोर, मोहन लाल, भूरियाशंकर लाल मयड़ा, कैलाश जी बुज, प्रभु लाल कटारा सहित संगठन के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
अब देखना होगा कि प्रशासन जर्जर भवनों की इस समस्या पर कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और बारिश के बीच नौनिहालों की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत