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नीमच । शहर के जरौली ट्रेड सेंटर स्थित राजेश ट्रेडर्स पर खाद्य सुरक्षा एवं जिला प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा की गई कार्रवाई के बाद व्यापारिक वर्ग में कई सवाल उठने लगे हैं। करीब 1.42 लाख रुपये मूल्य का घी जब्त कर चार नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, लेकिन चर्चा इस बात की है कि जिस ब्रांड का घी जांच के दायरे में आया, वह शहर के कई अन्य प्रतिष्ठानों पर भी खुलेआम बिक रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यदि किसी ब्रांड या उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह था, तो उसी ब्रांड के नमूने अन्य दुकानों से भी लिए जाने चाहिए थे। इससे जांच अधिक व्यापक और निष्पक्ष दिखाई देती। केवल एक प्रतिष्ठान पर कार्रवाई होने से बाजार में तरह-तरह की चर्चाओं ने जन्म ले लिया है। दूसरी ओर, प्रशासन का पक्ष है कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत निरीक्षण और नमूना संग्रहण नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है तथा किसी भी प्रतिष्ठान का आकस्मिक निरीक्षण किया जा सकता है और अभी नीमच ही नहीं बल्कि प्रदेश स्तर पर ऐसी कार्यवाही लगातार होती रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि संबंधित घी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि उपभोक्ताओं के हित में खाद्य पदार्थों की नियमित जांच आवश्यक है, लेकिन ऐसी कार्रवाई सभी व्यापारियों के लिए समान और पारदर्शी होनी चाहिए। यदि किसी विशेष ब्रांड पर संदेह है, तो उसके विभिन्न विक्रेताओं से भी नमूने लेकर जांच करने से कार्रवाई पर उठने वाले सवाल स्वतः समाप्त हो सकते हैं। अब सभी की निगाहें प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला केवल नियमित जांच का था या वास्तव में गुणवत्ता में कोई कमी पाई गई। तब तक किसी भी व्यापारी या ब्रांड को दोषी मानना उचित नहीं होगा। भूमिका: यह लेख किसी पर आरोप नहीं लगाता, बल्कि निष्पक्षता और पारदर्शिता का प्रश्न उठाता है। |