रतलाम/भोपाल। विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को पूरे मध्यप्रदेश में शासकीय अवकाश घोषित किए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। सैलाना विधानसभा क्षेत्र के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेशभर में 9 अगस्त 2026 को सरकारी अवकाश घोषित करने का आग्रह किया है।
विधायक का कहना है कि यह निर्णय प्रदेश के करोड़ों आदिवासी समाज की भावनाओं का सम्मान करने के साथ-साथ उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उचित पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
विधायक डोडियार द्वारा 1 अगस्त 2026 को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि विश्व आदिवासी दिवस प्रतिवर्ष 9 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र के आह्वान पर पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिन आदिवासी समुदायों की संस्कृति परंपरा इतिहास संवैधानिक अधिकारों तथा मानव सभ्यता में उनके अमूल्य योगदान का सम्मान किया जाता है। ऐसे में आदिवासी बहुल राज्य मध्यप्रदेश में इस दिवस को विशेष महत्व के साथ मनाया जाना आवश्यक है !
पत्र में कहा गया है कि मध्यप्रदेश देश के प्रमुख आदिवासी बहुल राज्यों में शामिल है जहां भील गोंड बैगा कोरकू भारिया सहरिया सहित अनेक जनजातियां निवास करती हैं। इन समुदायों ने प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा सामाजिक विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इसके बावजूद विश्व आदिवासी दिवस पर शासकीय अवकाश नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में लोग सरकारी दायित्वों के चलते कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो पाते।
विधायक डोडियार ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि 9 अगस्त 2026 को पूरे मध्यप्रदेश में शासकीय अवकाश घोषित कर आदिवासी समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाए ताकि प्रदेशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि इससे आदिवासी संस्कृति परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ेगी तथा सामाजिक समरसता को भी मजबूती मिलेगी।
पत्र के अंत में विधायक ने मुख्यमंत्री से इस संबंध में शीघ्र निर्णय लेकर आवश्यक आदेश जारी करने तथा की गई कार्रवाई से अवगत कराने का अनुरोध किया है।
अब इस पत्र के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति और आदिवासी समाज में इस मांग को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है तो विश्व आदिवासी दिवस पर प्रदेशव्यापी शासकीय अवकाश घोषित होने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है, जिसे आदिवासी समाज के सम्मान से जुड़े एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय के रूप में देखा जाएगा।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत