बाजना (रतलाम )। जैन उपाश्रय में वर्षावास हेतु विराजित साध्वी श्री अर्पिता श्रीजी एवं साध्वी श्री पंत सिद्धि श्रीजी के पावन सान्निध्य में आयोजित धर्मसभा में चातुर्मास की महत्ता पर प्रेरणादायी प्रवचन हुए। बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं समाजजन उपस्थित रहे। साध्वीश्री ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तप और आध्यात्मिक उन्नति का स्वर्णिम अवसर है। इस दौरान अधिक से अधिक धर्म आराधना नियम पालन तपस्या और आत्मचिंतन कर जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी श्री अर्पिता श्रीजी ने कहा कि साधनों में नहीं, साधना में मस्त बनो। साधना की मस्ती जीवन की सुस्ती को दूर कर देती है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास जन-जन के कल्याण और जैन धर्म के सर्वमंगल का संदेश लेकर आता है। यह चार महीनों का ऐसा पावन काल है जिसमें त्याग, तपस्या, संयम और आत्मकल्याण के माध्यम से जीवन को नई दिशा दी जा सकती है।
उन्होंने आषाढ़ी चौदस (चातुर्मासिक चौदस) का विशेष महत्व बताते हुए कहा कि यह पर्व त्याग और तपस्या का संदेश देता है तथा प्रत्येक व्यक्ति को इस अवधि में अधिक से अधिक धार्मिक आराधना का संकल्प लेना चाहिए।
धर्मसभा में साध्वी श्री पंत सिद्धि श्रीजी ने पारिवारिक जीवन में प्रेम, सहनशीलता और संस्कारों का महत्व बताते हुए कहा कि यदि परिवार में प्रेम और सौहार्द बनाए रखना है तो मनुष्य को रोटी की तरह नहीं बल्कि काली मिट्टी की तरह बनना होगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रोटी थोड़ी सी तेज अग्नि में जल जाती है जबकि मिट्टी हर कठिनाई को सहन करके भी उपजाऊ बन जाती है। इसी प्रकार जीवन में धैर्य, सहनशीलता और विनम्रता अपनाने से परिवार और समाज में प्रेम बना रहता है।
चातुर्मास समिति के सदस्यों ने बताया कि गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जैन मंदिर में गुरु गौतम स्वामीजी की प्रतिमा पर विशेष गुरु पूजन का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही गुरु महिमा पर विशेष प्रवचन एवं पूजन कार्यक्रम भी आयोजित होंगे जिनमें बड़ी संख्या में समाजजन सहभागिता करेंगे। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से धर्म लाभ लेकर चातुर्मास को तप, त्याग और साधना के माध्यम से सफल बनाने का आह्वान किया।
रिपोर्ट ईश्वर टांक ( बाजना )
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत