रतलाम । मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2010 के तहत आम नागरिकों को निर्धारित समयसीमा में शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। समयसीमा का पालन नहीं करने वाले तीन राजस्व अधिकारियों पर कुल 9250 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। यह कार्रवाई अपर कलेक्टर बृजेंद्र कुमार रावत द्वारा की गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी सेवाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत नायब तहसीलदार जावरा न्यायालय नायब तहसीलदार टप्पा ढोढ़र न्यायालय तथा तहसीलदार जावरा से संबंधित कुल 37 प्रकरण निर्धारित समयसीमा से बाहर पाए गए। इन मामलों में आवेदनों का समय पर निराकरण नहीं होने के कारण नागरिकों को आवश्यक शासकीय सेवाएं समय पर नहीं मिल सकीं। इसे लोक सेवा गारंटी अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की गई।
अपर कलेक्टर द्वारा अधिनियम की धारा 7(1)(क) के तहत नायब तहसीलदार जावरा भगवानसिंह ठाकुर पर 17 लंबित प्रकरणों के लिए 4250 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। वहीं नायब तहसीलदार टप्पा ढोढ़र वैभव जैन पर 12 लंबित प्रकरणों के कारण 3000 रुपये तथा तहसीलदार जावरा सहदेव मोरे पर 8 लंबित प्रकरणों के लिए 2000 रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराना है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
समयसीमा का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे अधिकारियों और कर्मचारियों को समयबद्ध कार्य निष्पादन का स्पष्ट संदेश मिला है !
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत