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मुर्ख और शंख दूसरों के फूंकने से ही बजते हैं : पं. कुलदीप शर्मा चीताखेडा । स्थानीय माली मौहल्ले में स्थित शिव मंदिर प्रांगण में समस्त माली समाज व ग्राम वासियों के तत्वावधान में हो रही श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बडे ही धूमधाम के साथ मनाया गया।कथा में जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग आया पूरा पंडाल हाथी घोडा पालकी जय कन्हैयालाल के जयकारों से गूंज उठा।श्रध्दालुओं ने बाल स्वरूप श्रीकृष्ण के दर्शन किए और व्यासपीठ पर विराजित कथा मर्मज्ञ पंडित कुलदीप शर्मा बांगरेड ने नन्हें बाल स्वरूप कान्हा को दुलारा। कृष्ण जन्मोत्सव पर कथा पंडाल में श्री कृष्ण के बाल स्वरुप के दर्शन करने आ गया गोरिल्ला । छोट-छोटे बच्चों का हुजूम उमड़ पड़ा बच्चों के साथ गोरिल्ला ने भी जमकर नृत्य किया। कथा मे पंडित कुलदीप शर्मा ने श्रीकृष्ण प्रसंग सुनाते हुए कृष्ण की बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि कंस के अत्याचारों के कारण ही उसने अभिमान और अनितिपूर्वक राज करने के लिए अपने पिता उग्रसेन को बंदी बना लिया था।आकाशवाणी से अपनी भावी मृत्यु का संकेत पाकर उसने अपनी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया।वहां एक एक कर उनके 6पुत्रों की हत्या कर दी।सातवें गर्भ में खुद शेषनाग के आने पर योग माया ने उनके देवकी के गर्भ से निकाल कर वासुदेव की पहली पत्नी रोहणी के गर्भ में स्थापित कर दिया।भगवान ने 8 वी संतान के रूप में जन्म लिया।इस दौरान बालकृष्ण को कंस के कारागार से नंद बाबा के घर ले जाने की झांकी भी प्रस्तुत की गई।कथा मे पं.कुलदिप शर्मा ने रसास्वादन करवाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्णपक्ष अष्टमी को रात्री 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ।भगवान कृष्ण ने संसार को अंधेरे से प्रकाश में लाने के लिए जन्म लिया और अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान रुपी प्रकाश से दूर किया। पंडित कुलदीप शर्मा ने कहा कि जब जब धर्म की हानि इस एकता के भंग होने पर हूई है,भगवान ने अवतार लेकर इसे पुनः स्थापित किया हैं।सभी मानव के मानवीयता से अभिसिचि हो सकते हैं,अमानवीयता से नहीं।हम एक थे हम एक है।और एक रहेंगे यह युगों का सत्य है।शरीर के अंग पृथक होकर भी एक है। सृष्टि के जीव भिन्न होकर भी अभिन्न हैं,क्योंकि उसका सृष्टि एक हैं।,जन्मदाता एक है,।पालनकर्ता एक हैं और संहारक भी एक ही हैं। शक्तियां अनेक हैं फिरभी परमशक्ति एक हैं।कथा में उन्होंने राधाकृष्ण के प्रेम का वर्णन करते हुए कहा कि श्याम से मिलना हैं तो राधाजी को याद करो।कथा मे श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग पर कथा पंडाल में उपस्थित श्रध्दालु भाव विहल हो गए।श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर वासुदेव के रूप में चिराग माली एवं कृष्ण के रूप में कृष्णा माली ने सुन्दर पात्र के रूप में कृष्ण जन्मोत्सव को साकार कर दिया।इस दौरान ....खुल गए सारे ताले करामात हो गई............,गोविंद गोकुल आयो.........,नंद के घर आनंद भयो.........., बाजे- बाजेरे शहनाई बधाई हो मैया तोरे अंगना.......…..आदि कृष्ण भजनों से पंडाल गूंज उठा।यह दृश्य देख भक्त भाव विभोर हो गये।महिलाओं ने पूरे मनोभाव से भगवान कृष्ण जन्मोत्सव पर जमकर नृत्य किया ।श्रोताओं ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में अपनी पूरी भक्ति भावना उडेल दिया।कथा के प्रारंभ मे मुख्य यजमान घीसालाल माली ने परिवारजनो के साथ व्यास पीठ पर पौथी पूजन कर आरती की। कथा पंडाल में श्रीमद् भागवत कथा प्रसंग में वामन अवतार विस्तृत रूप से समझाया गया जिसमें कुलदीप माली (वामनदेव) का स्वांग रचा।इसी तरह श्रीराम अवतार प्रसंग में भी हनुमान जी की झांकी दर्शाई गई जिसमें कुलदीप माली (हनुमान जी) का स्वांग रचा जो आकर्षण का केंद्र रहा। कन्हैया को लगाया भोग श्रीमद भागवत कथा प्रवचन के दौरान योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की खुशी में पं. कुलदीप शर्मा ने खिलोने गेन्द,चौकलेट के रूप में व्यास पीठ से खुब लुटाई दी बधाई।माखन-मिश्री,चरणामृतऔर पंजेरी प्रसाद का भोग लगाकर कथा आरती के पश्चात वितरण की । श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन के दौरान मत्स्य अवतार,सुखदेव,राजा परिक्षित,सूरसेन, उग्रसेन,भगवान शंकर, जरासंध, रामचरित मानस प्रसंग को संक्षिप्त रूप से वर्णन सुनाया। प्रतिदिन श्रीमद भागवत कथा में बडी संख्या में श्रौताओ की भीड ज्ञान गंगा में गोते लगा रही हैं।प्रतिदिन श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा प्रवचन दोपहर 11:30बजे से शाम 3 :30 बजे तक प्रवाहित किए जा रहे हैं। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |