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प्रतापगढ़। नगर परिषद में वर्ष 2012 और 2018 में हुई सफाईकर्मी भर्ती अब बड़े घोटाले का रूप लेती दिखाई दे रही है। पूर्व सभापति कमलेश डोसी के कार्यकाल में की गई भर्तियों को लेकर गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि कुछ पार्षदों के परिजनों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया और चरित्र सत्यापन में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बावजूद उन्हें नौकरी दे दी गई। जिले के कलेक्टर की सूझबूझ और सख्त रुख के चलते अब इस पूरे मामले की परतें एक-एक कर खुल रही हैं। करीब 7 करोड़ रुपये की नीलामी पहले ही निरस्त की जा चुकी है, जिससे पूरे प्रकरण की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऑपरेशन चंगुल में सामने आईं चौंकाने वाली बातें चल रहे विशेष अभियान ऑपरेशन चंगुल के तहत गठित जांच समिति ने चरित्र प्रमाण-पत्र, मूल निवास और शैक्षणिक दस्तावेजों में भारी अनियमितताएं पाई हैं। कई मामलों में फर्जी प्रमाण-पत्रों के आधार पर नियुक्ति दिए जाने के आरोप हैं। सूत्रों के अनुसार, नगर परिषद में कार्यरत अथवा पूर्व में कार्यरत कुछ कर्मचारियों और पार्षदों के परिजनों को नियमों को दरकिनार कर लाभ पहुंचाया गया। यह भी सामने आया है कि जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज थे, उनका चरित्र सत्यापन होने के बावजूद उन्हें सेवा में रख लिया गया। दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी जांच रिपोर्ट में वैधानिक रूप से नियुक्त अभ्यर्थियों की सेवाएं निरस्त करने की अनुशंसा की गई है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल दोषी लोक सेवकों, तत्कालीन सभापति, पार्षदगण, मनोनीत सदस्यों और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियम अनुसार कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है। नगर परिषद में हुए इस कथित भर्ती घोटाले ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि विभागीय स्तर पर कितनी सख्ती से कार्रवाई अमल में लाई जाती है और क्या दोषियों तक कानून का शिकंजा पहुंच पाता है या नहीं। रिपोर्ट : मुकेश पाटीदार |