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आस्था, श्रद्धा और जिम्मेदारी का संगम, मुकाम-समराथल-पीपासर मेले में पर्यावरण सेवकों ने कचरा बीनकर व दुकानदारों को जागरूक कर सिंगल यूज प्लास्टिक के बहिष्कार का दिया सशक्त संदेश भीलवाड़ा/धोरीमन्ना । मुकाम-समराथल-पीपासर में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय मेले में इस वर्ष भक्ति,परंपरा और संस्कृति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की सशक्त चेतना भी देखने को मिली।दूर-दूर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं की आस्था के बीच अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणविद् खमुराम बिश्नोई के नेतृत्व में पर्यावरण सेवकों ने कोशिश पर्यावरण सेवक टीम के बैनर तले पॉलिथीन मुक्ति और सिंगल यूज प्लास्टिक कप-गिलास के बहिष्कार को लेकर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया।मेले का वातावरण जहां धार्मिक अनुष्ठानों और भजनों से गुंजायमान था वहीं स्वच्छता और हरित भविष्य का संदेश भी उतनी ही मजबूती से प्रसारित हो रहा था। कोशिश पर्यावरण सेवक टीम की शाखा सांचौरी-मालाणी के सह-प्रभारी व स्टेट अवार्डी शिक्षक जगदीश प्रसाद विश्नोई ने बताया कि पर्यावरण सेवक मेले से तीन दिन पहले से ही पहूंच गये।पर्यावरण सेवक समूहों में विभाजित होकर पूरे मेले परिसर में भ्रमण करते रहे और दुकानदारों को पाबंद करने लगे कि मेले परिसर में सिंगल यूज प्लास्टिक जिसमें डिस्पोजेबल कप-गिलास व पॉलिथीन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना है यदि ऐसा करते पाये गये तो आपको दुकान नहीं लगाने दी जायेगी। पर्यावरण सेवक हाथों में जागरूकता संदेश लिखी तख्तियां और बैनर थे जिन पर पॉलिथीन छोड़ो,प्रकृति जोड़ो,स्वच्छ मेला,हरित मेला,सिंगल यूज प्लास्टिक त्यागें जैसे संदेश अंकित थे इसके साथ ही श्रद्धालुओं को समझाया गया कि धार्मिक स्थलों और आयोजनों की पवित्रता बनाए रखने के लिए स्वच्छता अनिवार्य है।अभियान की सबसे प्रभावशाली पहल रही मेले परिसर में फैले कचरे को स्वयं एकत्रित करना और लोगों से अपील की कि वे प्लास्टिक सामग्री का उपयोग न्यूनतम रखें।इस दौरान कई श्रद्धालु भी पर्यावरण सेवकों के साथ जुड़ गए और स्वच्छता अभियान में सहयोग दिया।बच्चों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई जिससे पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। दुकानदारों के साथ संवाद इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।सेवकों ने उन्हें सिंगल यूज प्लास्टिक की थैलियों,कप-प्लेट और पैकेजिंग सामग्री के स्थान पर धातु के बर्तन,कपड़े के थैले या अन्य पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया।उन्हें बताया गया कि प्लास्टिक कचरा वर्षों तक नष्ट नहीं होता और यह मिट्टी तथा जल स्रोतों को प्रदूषित करता है।कई व्यापारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में प्लास्टिक उपयोग कम करने का आश्वासन दिया। मेले में आयोजित जागरूकता संवाद और छोटे-छोटे समूह चर्चा कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को यह समझाया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।सेवकों ने कहा कि यदि हम धार्मिक आयोजनों में स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित कर सकें तो यह समाज में बड़े बदलाव की शुरुआत हो सकती है।पूरे मेले के दौरान स्वच्छता और पॉलिथीन मुक्ति का संदेश निरंतर गूंजता रहा।कई श्रद्धालुओं ने मौके पर ही कपड़े के थैले उपयोग करने और प्लास्टिक सामग्री से दूरी बनाने का संकल्प लिया।यह पहल इस बात का प्रमाण बनी कि जब आस्था के साथ जिम्मेदारी जुड़ जाती है तो परिवर्तन निश्चित हो जाता है। मुकाम-समराथल-पीपासर का यह राष्ट्रीय मेला केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा।सामूहिक प्रयास,जागरूकता और दृढ़ संकल्प से ही स्वच्छ,हरित और पॉलिथीन मुक्त समाज का सपना साकार किया जा सकता है।यह अभियान आने वाले समय में अन्य आयोजनों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध होगा।इस राष्ट्रीय मेले में पर्यावरण संरक्षण व मानव सुधार का संदेश देने के लिए देशभर से पर्यावरण सेवक पहूंचे जिसमें जोधपुर से टीम के राष्ट्रीय प्रभारी खमुराम बिश्नोई,भंवरी कालिराणा,शिव भोली शोभाराणी,इन्द्रा बिश्नोई,पूनाराम गोखर,सुखराम जंवर, नारायण खोड,मध्य प्रदेश से मुकेश कावां,हरियाणा से अनिल खीचङ, बाङमेर-बालोतरा से किशनाराम बांगङवा,स्टेट अवार्डी शिक्षक जगदीश गोदारा,धोलाराम कपासिया,वगताराम भाम्भु,रघु कावां, अरमान कङवासरा,सांचौर से मगाराम काछेला,श्रवण सारण,वर्षा बिश्नोई,दिनेश सेङिया,नरेश,गंगानगर से नीतू बिश्नोई,अक्षित,बीकानेर से शिवरतन धारणिया व फलोदी से शर्मिला गोदारा सहित अनेक पर्यावरण सेवकों ने पर्यावरण संरक्षण व मानव सुधार का संदेश दिया। रिपोर्ट : राजकुमार गोयल |