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सिंगोली / रतनगढ़ के बरेखन क्षेत्र में खेत पर काम कर रहे एक 26 वर्षीय आदिवासी मजदूर को जहरीले सांप ने डस लिया। सर्पदंश के बाद युवक की हालत तेजी से बिगड़ने लगी, लेकिन परिजनों की सूझबूझ और रतनगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की चिकित्सा टीम की तत्परता से उसकी जान बच गई। डॉक्टरों ने मोर्चा संभालते हुए मरीज को तत्काल 10 एएसवी (एंटी-स्नेक वेनम) की खुराक दी, जिससे जहर का असर थम गया। प्राथमिक उपचार के बाद युवक को जिला चिकित्सालय नीमच रेफर किया गया है, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर है। जानकारी के अनुसार, रतलाम जिले के शिवगढ़ क्षेत्र के ग्राम खैरा खूट निवासी मुकेश (26) पिता भाजी बाबर, रतनगढ़ के समीप बरेखन क्षेत्र में रहकर खेतों में मजदूरी कर रहा था। काम के दौरान अचानक एक अत्यधिक जहरीले सांप ने उसे काट लिया। देखते ही देखते मुकेश के शरीर में जहर फैलने लगा और उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन और स्थानीय ग्रामीण बिना समय गंवाए उसे तुरंत रतनगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने तुरंत शुरू किया इलाज अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉ. प्रांकुर यादव, पवन भंडारी, तारेश ग्वाला और मीनाक्षी बैरागी की टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल इलाज शुरू किया। मरीज को काउंटर डोज के रूप में 10 एएसवी इंजेक्शन दिए गए। सही समय पर मिले इस इलाज से मुकेश की स्थिति स्थिर हो गई। इसके बाद बेहतर निगरानी के लिए उसे नीमच जिला अस्पताल भेजा गया। चिकित्सकों के प्रति बढ़ा विश्वास लोगों ने की सराहना क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि रतनगढ़ स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों द्वारा पहले भी कई सर्पदंश के मामलों में तत्परता दिखाकर मरीजों की जान बचाई गई है। डॉक्टरों की इस सक्रियता और सेवाभाव को स्थानीय नागरिकों ने एक सराहनीय पहल बताया है। समय पर उचित इलाज मिलने से अब ग्रामीणों में झाड़-फूंक के प्रति अंधविश्वास कम हो रहा है और सरकारी डॉक्टरों व अस्पताल के प्रति उनका विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है। क्षेत्रवासियों ने इस जीवनदान के लिए पूरी चिकित्सा टीम का आभार व्यक्त किया। झाड़-फूंक में न गंवाएं समय चिकित्सकों के अनुसार, सर्पदंश के मामलों में पहला एक घंटा (गोल्डन ऑवर) बेहद महत्वपूर्ण होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर लोग मरीज को झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के चक्कर में ले जाते हैं, जिससे जहर पूरे शरीर में फैल जाता है और जान बचाना मुश्किल होता है। सांप काटने पर बिना डरे सीधे नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचना चाहिए, जहां एंटी-स्नेक वेनम (ASV) पूरी तरह निशुल्क और उपलब्ध रहता है। रिपोर्ट : दिनेश जी जोशी |