रतलाम /सैलाना। नगर परिषद सैलाना की राजनीति में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। नगर परिषद अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला के खिलाफ पहले दायर की गई हाईकोर्ट याचिका खारिज होने के बाद अब इसी मामले को लेकर दोबारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की चर्चा ने स्थानीय राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सामने आए हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के स्क्रीनशॉट ने इस पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
मामले से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार Writ Petition (WP) No. 11010/2026 इंदौर हाईकोर्ट में दर्ज हुई थी। स्क्रीनशॉट में याचिका की स्थिति 13 मई 2026 को Dismissed दिखाई दे रही है। इस मामले में सलोनी मांडोत, जिनके पति प्रशांत मांडोत हैं, तथा जितेंद्र सिंह याचिकाकर्ताओं के रूप में दर्ज दिखाई दे रहे हैं। मामले में मध्यप्रदेश शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास, कलेक्टर रतलाम, नगर परिषद सैलाना तथा नगर परिषद अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला सहित अन्य पक्षकार बनाए गए थे।
पहले वित्तीय अधिकारों को लेकर पहुंचा था मामला हाईकोर्ट
बताया गया था कि पूर्व में दायर याचिका में नगर परिषद अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला के वित्तीय अधिकारों को लेकर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह तर्क रखा गया था कि अध्यक्ष के निर्वाचन से संबंधित आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया एवं गजट अधिसूचना के संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं है, इसलिए अध्यक्ष को वित्तीय अधिकार दिए जाने पर रोक लगाई जाए।
10 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तत्काल वित्तीय अधिकारों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जबकि बाद में 13 मई को याचिका को निरस्त कर दिया गया। इस आदेश के बाद अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला को तत्काल राहत मिली और उनके वित्तीय अधिकार यथावत बने रहे।
अब क्वो वारंटो के जरिए फिर उठ सकता है मामला!
इसी बीच मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के हालिया आदेश ने सैलाना के इस पुराने विवाद को नई हवा दे दी है। जावरा और नागदा नगर परिषद से जुड़े मामलों में डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति के सार्वजनिक पद पर बने रहने के वैधानिक अधिकार पर सवाल उठता है तो क्वो वारंटो याचिका को केवल देरी के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
यही कारण है कि सैलाना में भी अब इस कानूनी सिद्धांत को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक एवं कानूनी हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या पूर्व में खारिज हो चुके मामले के बाद अब अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला के खिलाफ नए सिरे से क्वो वारंटो अथवा अन्य वैधानिक राहत के लिए रिट याचिका दाखिल की जाएगी?
स्क्रीनशॉट ने बढ़ाई हलचल, लेकिन नई याचिका की आधिकारिक पुष्टि बाकी
सामने आए स्क्रीनशॉट में पुरानी याचिका WP 11010/2026 की न्यायालयीन स्थिति दर्ज है। इसलिए फिलहाल उपलब्ध स्क्रीनशॉट को नई याचिका दाखिल होने का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। हालांकि, मामले को लेकर दोबारा कानूनी तैयारी की चर्चा जरूर तेज हो गई है।
यदि नई याचिका दाखिल होती है और उसमें नगर परिषद अध्यक्ष के पद पर बने रहने के वैधानिक अधिकार को ही चुनौती दी जाती है, तो सैलाना की नगर परिषद की राजनीति में इसका असर व्यापक हो सकता है। खासकर ऐसे समय में जब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने जावरा और नागदा के मामलों में Quo Warranto को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत सामने रखा है।
फिलहाल अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला की कुर्सी पर तत्काल कोई न्यायिक संकट नहीं है, क्योंकि पूर्व याचिका खारिज हो चुकी है और उनके खिलाफ कोई नया अंतिम न्यायिक आदेश सामने नहीं आया है। लेकिन यदि नई रिट वास्तव में दाखिल होती है, तो सैलाना नगर परिषद में यह मामला एक बार फिर स्थानीय राजनीति से निकलकर सीधे हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सैलाना के इस पुराने विवाद में अगला कानूनी कदम क्या होता है—क्या मामला यहीं थमेगा या हाईकोर्ट में एक बार फिर नई रिट के साथ अध्यक्ष चैतन्य शुक्ला के खिलाफ कानूनी मोर्चा खुलेगा?
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत