मंदसौर। अफीम उत्पादक संघर्ष समिति के नेतृत्व में गुरुवार को अफीम उत्पादक किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संजीत टप्पा कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद किसानों ने राष्ट्रपति प्रधानमंत्री केंद्रीय वित्त मंत्री और केंद्रीय नारकोटिक्स आयुक्त ग्वालियर के नाम नायब तहसीलदार राहुल डाबर को विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में किसानों ने मांग की है कि वर्ष 2026-27 की नई अफीम नीति पिछले वर्ष की तरह सितंबर के पहले सप्ताह में जारी की जाए ताकि किसान समय पर अपनी तैयारियां कर सकें। किसानों ने अफीम का सरकारी खरीद मूल्य बढ़ाकर 15000 रुपये प्रति किलोग्राम करने की मांग भी रखी। इसके साथ ही वर्ष 1997-98 में अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से प्रभावित होकर सी लाइसेंस हुए किसानों को इस वर्ष शून्य प्रतिशत किलो प्रति हेक्टेयर के आधार पर पुनः लाइसेंस जारी करने की मांग की गई।
संघर्ष समिति ने वित्त मंत्रालय से अफीम की फसल को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में शामिल करने की मांग करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से हर वर्ष किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है लेकिन उन्हें किसी प्रकार की सुरक्षा नहीं मिलती। किसानों ने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि को देखते हुए मॉर्फिन प्रतिशत की अनिवार्यता में राहत देने तथा तीन वर्षों की औसत मॉर्फिन के आधार पर लाइसेंस जारी करने की मांग भी रखी।
ज्ञापन में किसानों ने अफीम और डोडा चूरा की सरकारी खरीद जारी रखने पर जोर दिया तथा सीपीएस पद्धति समाप्त करने की मांग की। वर्ष 1990 से अब तक निरस्त किए गए पुराने अफीम लाइसेंस पुनः बहाल करने की मांग की तथा किसानों के पास पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध हैं लेकिन नारकोटिक्स विभाग के रिकॉर्ड में जानकारी नहीं है और जो वर्ष 2025-26 की नीति के अनुसार पात्र थे उन्हें तत्काल लाइसेंस जारी किए जाएं। किसानों ने एनडीपीएस एक्ट में संशोधन कर मूल लाइसेंसधारी किसान की मृत्यु के बाद वैध वारिस को लाइसेंस हस्तांतरित करने की व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी।
संघर्ष समिति ने वर्ष 2000 से पहले के हजारों अफीम उत्पादक किसानों के साथ हुई कथित विसंगतियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। ज्ञापन में कहा गया कि उस समय मॉर्फिन जांच की आधुनिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी जिसके कारण कई किसानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए। किसानों ने वन टाइम सेटलमेंट और पेनल्टी के आधार पर ऐसे सभी पुराने लाइसेंस पुनः बहाल करने की मांग की।
किसानों ने पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की कार्यप्रणाली पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि सरकारी खरीद शुरू होने से पहले कच्चा तोल और दैनिक रजिस्टर प्रक्रिया के नाम पर किसानों के घरों पर जांच और उत्पीड़न बंद किया जाए। इसके साथ ही एनडीपीएस एक्ट की धारा 8 और 29 के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इन प्रावधानों को हटाने की मांग भी की गई।
इस आंदोलन का नेतृत्व अफीम उत्पादक संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरसिंह डांगी ने किया। ज्ञापन में राष्ट्रीय प्रवक्ता सह संयोजक राजकुमार योगी तथा राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी बंशीलाल धाकड़ के नाम भी प्रमुख रूप से दर्ज हैं। बड़ी संख्या में अफीम उत्पादक किसान धरना प्रदर्शन में शामिल हुए और सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।