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हम भूल गए कि वृक्षों में बसते हैं हमारे देवता - डॉ.आशिष जैन चीताखेड़ा -5 जुलाई। बेटे -बेटियों के जन्म दिवस पर होटलों में अंधाधुंध फिजूलखर्ची करना एक पाश्चात्य संस्कृति परंपरा बनती जा रही है। हम फिजूलखर्ची के बजाए बेटे-बेटियों के जन्मदिन पर गौशाला, स्कूलों, श्मशान घाट और धार्मिक स्थलों पर पौधे लगाकर मनाना चाहिए। इसकी शुरुआत भूलोक के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर बीएएमएस आशीष कुमार जैन पांच वर्षों से किए हुए हैं जो निर्णय स्वागत योग्य है। बेटे के जन्म दिवस के अवसर पर छः वर्ष में अभी तक 300 पौधे लगा चुके हैं और शत-प्रतिशत सही पौधे जिंदा है। मानसून की इस वर्ष बारिश की शुरुआत के साथ फूलदार, फलदार तथा छायादार सहित कई प्रजातियों के 70 से भी अधिक पौधे वृहद स्तर पर श्मशान घाट और शासकीय माध्यमिक विद्यालय परिसर में माता-पिता, दादाजी सपरिवार,प्राचार्य, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए साथ ही उनकी देखभाल का संकल्प भी लिया। उक्त बात शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय प्रधानाचार्य राजेश दास ने सोमवार को डॉक्टर आशीष कुमार जैन के बेटे के छठवें जन्मदिन के अवसर पर चीताखेड़ा के शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय और श्मशान घाट परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित ग्रामीणों एवं विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा है कि बस इस पर्व को कामयाब बनाने और पर्यावरण को हरा भरा करने के लिए पौधों की रक्षा की जिम्मेदारी का निर्वहन भी शिद्दत से करना होगा। डॉ. आशीष कुमार जैन ने अपने बेटे के जन्मदिन पर प्रतिवर्ष पौधे लगाए जाने का निर्णय लिया है। चीताखेड़ा में यह पहला मौका है जब बेटे के जन्मदिन के अवसर पर फिजूलखर्ची करने के बजाए पौधे देने के साथ ही उन्हें विभिन्न प्रजातियों के फूल व फलदार इन पौधों को पेड़ बनाने के लिए संकल्प भी दिलाया गया।मुख्य रूप से नीम,शिषम , करंज , बरगद , पीपल , महुआ, अशोक आदि पौधे लगाए गए हैं।इसके लिए सभी ने पौधारोपण व पर्यावरण संरक्षण के प्रति उत्साह दिखाया। डॉ आशीष कुमार जैन ने कहा कि हम भूल गए हैं कि वृक्षों में बसते हैं हमारे देवता। सिद्धार्थ गौतम को पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर प्रबोधन प्राप्त हुआ था। बौद्ध धर्म की सबसे प्रसिद्ध प्रतिमा इसी घटना की है। वृक्ष परमात्मा की करुणा की साकार अभिव्यक्ति है। प्राणियों के जीवन रक्षक और परमात्मा की पारमार्थिक सत्ता के संवाहक वृक्ष धरा के प्रत्यक्ष देवता हैं। शिक्षक विनोद माली ने कहा कि पेड़ों का संरक्षण करना हमारी संस्कृति है, पेड़ काटना हमारी संस्कृति नहीं है। मानव के जीवन के साथ भी और मृत्यु के बाद भी पौधे वृक्षों का आकार लेकर यादों को स्थायित्व प्रदान करते हैं। शिक्षिका श्रीमती संगीता आर्य ने कहा कि पौराणिक परंपराओं ने इन सभी विचारों को आत्मसात कर उन्हें देवताओं के साथ जोड़ा गया है। शिव बिल्व वृक्ष से जुड़े है, तीन पत्तियों वाले बिल्वपत्र को तोडने से पहले शिव का आह्मवान किया जाता है। वृंदावन में श्री कृष्ण भी कदंब की छाया में बांसूरी वादन करते थे। पूरे क्षेत्र में बच्चों के जन्मदिन के अवसर पर अभियान चलायें जाने की जरूरत है। पौधारोपण करना फोटो खिंचवाना और इति श्री कर लेने से पर्यावरण नहीं सुधरेगा। छ: वर्षीय बेटे ध्रुव जैन के जन्म दिवस के अवसर पर विगत चार सालों से पाश्चात्य संस्कृति के आधार पर जन्म दिवस मनाने के बजाए पौधा रोपण कार्य करते आ रहे हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रधानाचार्य राजेश दास, शिक्षक विनोद माली, शिक्षिका श्रीमती अलका जैन, शिक्षिका श्रीमती निर्मला नागरिया, श्रीमती ट्विंकल सोनी, श्रीमती संगीता आर्य, राकेश दमामी, कमलेश शर्मा,डॉ. दिनेश राणावत, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य देवीलाल जैन, डॉ आशीष कुमार जैन, पूर्व उप-सरपंच रतनलाल माली, हर्षित सोनी, योगेश पाटीदार, शांतिलाल जैन, राहुल मांगरिया, महेंद्र माली, श्मशान समिति अध्यक्ष शांतिलाल माली,यशवंत माली, सहित अन्य वरिष्ठजन मौजूद थे। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |