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नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि दक्षिण-पूर्व एशिया के एक गांव में शादी के बाद महिलाओं के पैर तोड़ दिए जाते हैं, ताकि वे अपने पति या ससुराल से भाग न सकें। वीडियो में कई महिलाओं को चलने में असमर्थ दिखाया गया और इसे कथित तौर पर वहां की विवाह परंपरा बताया गया। हालांकि, इस दावे की पड़ताल में सामने आया कि महिलाओं के पैर तोड़ने की किसी ऐसी विवाह परंपरा का कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं मिला है। हांगकांग विश्वविद्यालय के School of Future Media से जुड़े फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म Annie Lab ने जनवरी 2026 में इस वायरल वीडियो की विस्तृत जांच की। जांच के अनुसार वायरल वीडियो में इस्तेमाल किए गए दृश्य अलग-अलग पुराने वीडियो से लिए गए थे। इनमें दिखाई गई कम-से-कम तीन महिलाओं की शारीरिक स्थिति का संबंध शादी की किसी परंपरा से नहीं, बल्कि पहले से मौजूद बीमारी या शारीरिक अक्षमता से था। जांच में वियतनाम के Bình Phước की एक महिला Nhom (Nhôm) के वीडियो फुटेज की भी पहचान हुई। रिपोर्ट के अनुसार उन्हें बचपन में पोलियो हुआ था, जिसके कारण वह कमर से नीचे स्थायी रूप से चलने में असमर्थ हैं। उनके मूल वीडियो सहायता और आर्थिक सहयोग जुटाने के उद्देश्य से बनाए गए थे। वायरल वीडियो में इन वास्तविक फुटेज को अलग संदर्भ में जोड़कर यह कहानी बनाई गई कि महिलाओं के पैर शादी के बाद उनके पति तोड़ देते हैं। अलग-अलग सोशल मीडिया पोस्ट में इस कथित गांव का स्थान भी अलग-अलग बताया गया—कहीं अफ्रीका तो कहीं उत्तरी वियतनाम। फैक्ट चेक में ऐसी किसी संगठित विवाह प्रथा का प्रमाण नहीं मिला। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल “शादी के बाद महिलाओं के पैर तोड़ने वाले गांव” की कहानी को सच मानना भ्रामक है। SSE NEWS अपील: सोशल मीडिया पर किसी सनसनीखेज वीडियो या दावे को साझा करने से पहले उसके स्रोत और वास्तविकता की जांच जरूर करें। |